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मत समझो तुम एक बला है सेल्फी लेना बड़ी  कला है-1 कुछ लोगों के लिए 

Last Modified Aat : 10-Jul-18

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मत समझो तुम एक बला है सेल्फी लेना बड़ी  कला है-1 कुछ लोगों के लिए 

गिरीश पंकज

भले ही बला हैए  लेकिन आजकल 

सेल्फी लेना एक बड़ी कला है।

जो इस कला में  माहिर होते है। 

वे देर रात तक जागते है 

और दिन भर पेल कर सोते है  

बहुत बड़ी वाली कला।  जिसे सेल्फी लेना नहीं आताए उसके जीवन को धिक्कार हैए ऐसा आज के अनेक ज्ञानीजन कहते हैं।  जो लोग सेल्फी.कला में पारंगत नहीं होतेए  वे बेचारे चाह कर भी ठीक-ठाक सेल्फी ले नहीं पाते। कोशिश करते हैं और नाक कटा लेते हैं, यानी जब सेल्फी लेते हैं, तो पता चलाए नाक आधी ही आयी है।   उस दिन मेरा मित्र कह रहा था, जो ब्रह्म ज्ञानी किस्म के जीव होते हैं, वे सेल्फी लेने की कला को सीखते हुए ही बड़े होते हैं। कभी-कभी मैं दुखी होकर सोचता हूं कि वे मनुष्य कित्ते नादान होते हैं, जो सेल्फी लेते वक्त अपना चेहरा सामान्य बनाए रखते हैं । सही सेल्फी की खासियत यही होती है कि आप का चेहरा थोड़ा-सा तो विकृत हो । ज़्यादा विकृत भी हो सकता है। यह और अच्छी बात।  सेल्फी में इतनी छूट चलती है। यह तो आप की प्रतिभा  पर निर्भर करता है कि आप अपने चेहरे को किस तरह प्रस्तुत करना चाहते हैं ।  कुछ बुनियादी सूत्र ये हैं कि  सेल्फी लेते समय आपके होंठ सीटी बजाने की मुद्रा में हों। गाल कुछ पिचक जाएं।

आंखें विचित्र भाव-भंगिमाओं

के साथ नजर आएं।   कुल मिलाकर आपका चेहरा सामान्य तो बिलकुल नजर न आए, तब समझो ठीक-ठाक सेल्फी हो गई । लेकिन जो इस कला से वाकिफ नहीं हैं, वे बेचारे सेल्फी लेते वक्त अपना चेहरा सामान्य बनाए रखते हैं । कुछ इस तरह  हो जाते है गोया स्टूडियो में बैठ कर फोटू नखींचवा रहे हैं।  छी ! यह कैसी सेल्फी 

 मित्र तुमको सेल्फी  के बारे में इतनी अधिक जानकारी कैसे

 मेरे इस प्रश्न पर उसने हँसते हुए बताया, मेरे हाईटेक बेटे ने सेल्फीकला का ज्ञान दिया है बंधु। वह  दिन-रात मुन्ना भाई की तरह मोबाइलरत रहता है।

इतना बोल कर मित्र ने मुझे बड़े ही गर्वीलेभाव से देखा, गोया कहना चाह रहा  हो कि  देखो, मेरा बेटा कितने  कमाल का है।  मित्र ने आगे बताया, ,देखो लल्लू, आजकल अज्ञानी को लल्लू ही तो कहते हैं न! इसलिए उसके लल्लू कहने को मैंने अपनी मानहानि नहीं मानी  सेल्फी लेते वक्त इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि चेहरे पर प्रसन्नता नहीं,  तनाव की रेखाएं मंडरा रही हो । आपका चेहरा गंभीर दिखाई दे। क्योंकि सेल्फी लेना एक गंभीर-कर्म है। इसे मानवता की दिशा में उठाया कदम भी हम कह सकते हैं।  इसलिए अच्छे कर्म करते हुए मुस्कुराना पाप माना जाता है । हमेशा  गंभीर होकर के ही सेल्फी लेनी चाहिए। अगर आप  एकल सेल्फी ले रहे हैं, तो भी तरह-तरह से मुंह बना करके सेल्फी लेनी चाहिए । और अगर सामूहिक सेल्फी ले रहे हैं तो भी विचित्र किस्म के हाव-भाव बनाए रखने चाहिए । जिसके हाथ में मोबाइल कैमरा है, वह ध्यान रखे कि कैमरे में उसका आधा-अधूरा या पूरा चेहरा तो  आ जाए मगर  बाकी लोगों की हरकतें भी कैद हो जाएं। मैंने पूछा, मित्र कुछ चित्रों में लोग प्रसन्न हो कर हाथ को आड़ा-तिरछा कर लेते हैं। मुँह  भी बिगाड़ लेते है।  क्या यह सत्य  है। 

शेष कल के अंक में