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संपादकीय : यूपीए के मंसूबो पर पानी फिरा

Date : 10-Jul-18

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संपादकीय : यूपीए के मंसूबो पर पानी फिरा

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिशों में जुटी यूपीए और खासतौर पर कांगे्रस की उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया जब जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी ने एनडीए के साथ ही बने रहने का फैसला कर लिया। गौरतलब है कि जदयू को महागठबंधन में लाने के लिए कांगे्रस ने डोरे डालने शुरू कर दिए थे। बिहार के कांगे्रसी नेताओं ने जदयू सुप्रीमो और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शान में कसीदे पढऩे शुरू कर दिए थे। इस बीच बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर नीतीश कुमार ने जो असंतोष जाहिर किया था उसे देखकर राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही थी कि नीतीश कुमार एक बार फिर पाला बदल सकते है। किंतु उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ ही बने रहने का निर्णय लिया है। यही नहीं बल्कि जदयू की बैठक में यह भी कहा गया है कि वह एक देश एक चुनाव के पक्ष में है क्योंकि इससे फिजूलखर्ची कम होगी और चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल पर भी अंकुश लगेगा। जदयू ने लोकसभा चुनाव तो भाजपा के साथ मिलकर लडऩे का फैसला किया है लेकिन इसी साल होने वाले मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के विधानसभा चुनाव में उसने अकेले अपने दम पर चुनाव लडऩे का निश्चय किया है। जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी के मुताबिक इन चार राज्यों में भाजपा की विचारधारा अलग है और जदयू की अलग है इसलिए जहां हमारा गठबंधन नहीं है वहां जदयू अकेले चुनाव लड़ेगी। लोकसभा सीटों के बंटवारे का फार्मूला भी शीघ्र निकाल लिया जाएगा। नीतीश कुमार के इस फैसले से निश्चित रूप से कांगे्रस की कोशिशों को झटका लगा है। वहीं भाजपा की चिंता दूर हो गई है। ड्ड