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 संपादकीय : एक देश एक चुनाव पर मतभेद

Date : 09-Jul-18

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विधि आयोग ने एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से चर्चा शुरू कर दी है। पहली बैठक में देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव कराए जाने पर असहमति के स्वर सामने आए है। तृणमूल कांगे्रस, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और आईयूएमएल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। भाजपा की सहयोगी माने जाने वाली अन्ना द्रमुक ने भी एक देश एक चुनाव का विरोध किया है। वहीं भाजपा की एक अन्य सहयोगी गोवा फारवर्ड ब्लाक पार्टी ने भी इस प्रस्ताव की मुखालफत की है। अन्य क्षेत्रीय दलों में भी इस मुद्दे को लेकर असहमति नजर आ रही है। दरअसल क्षेत्रीय पार्टियां देश में एक साथ चुनाव चाहती ही नहीं है। ऐसी स्थिति में एक देश एक चुनाव की परिकल्पना का साकार हो पाना मुश्किल लग रहा है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने भी एक देश एक चुनाव की वकालत की थी और यह कहा था कि चुनाव आयोग पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए तैयार है। चुनाव आयोग का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च में भारी कटौती होगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अनेक अवसरों पर पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाने की जरूरत पर जोर देते रहे है। भाजपा इस बार लोकसभा चुनाव के साथ ही भाजपा शासित राज्यों हरियाणा और महाराष्ट्र में समय से पूर्व विधानसभा चुनाव कराने की रणनीति पर काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा के लिए स्थिति प्रतिकूल हो रही है। यही वजह है कि वह मोदी मैजिक के सहारे इन दोनों राज्यों में चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश कर सकती है। यदि लोकसभा चुनाव के साथ ही इनके विधानसभा चुनाव भी कराए गए तो भाजपा को लाभ मिल सकता है। बहरहाल क्षेत्रीय दलों के विरोध को देखते हुए लोकसभा के साथ ही सभी विधानसभाओं के चुनाव कराए जाने की राह आसान नहीं है। इसमें कई व्यवहारिक दिक्कतें है। जब तक उन्हें दूर नहीं किया जाएगा तब तक एक देश एक चुनाव की अवधारणा का सफलीभूत हो पाना मुश्किल ही लगता है।