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जादूगर अफसरों को प्रणाम

Last Modified Aat : 09-Jul-18

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जादूगर अफसरों को प्रणाम

अपने देश के कुछ लोगों या अफसरों का जीवन बड़ा ही जादुई या कहें कि मायावी किस्म का होता है।  इस कला को वे उस दिन से अर्जित कर लेते हैं, जब वे मनुष्य जीवन से छुट्टी प्राप्त कर के अफसर या अधिकारी हो जाते हैं। अध्ययनरूपी तंत्र-साधना करके वे पहला जादू अपन आप पर ही करते हैं और उनकी फितरत हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाती है। देखते ही देखते वे समाज की नई प्रजाति के हिस्से बन जाते हैं - यानी अफसर। हाथ घुमा कर छू-मंतर करते हैं और उनके चेहरे से मुसकान गायब हो जाती है। शरीर कुछ ज्यादा तन जाता है और आँखों में गुरूर टाइप की कुछ चीज  भी नजर आने लगती है। वह निजी या सरकारी नौकर ही रहता है जीवन भर मगर अपने को सामंत या मालिक से कम नहीं समझता।   अफसर के सज्जन पिताश्री देखते हैं और चकित रह जाते हैं, कि कल तक तो अपना बब्बू-डब्बू हँसता-मुसकराता था, सबसे मनुष्य जैसा बतियाता था, लेकिन अचानक इसे ई का हुई गवा है। कहीं किसी ने कुछ कर-कुरा तो नहीं दिया। जादू-टोना। 

पिताश्री को क्या मालूम कि उनका बिटवा इक जादूगर हुई गवा है। सबसे पहले उसने जादूगीरी के सहारे अपने आप को बदला है। अब उसके होठों पर मुसकान नहीं दिखती। हमेशा कठोरता की खलनायिका हँसती नजर आती है। पहले वह राष्ट्रभाषा हिंदी में गोठियाता था, लेकिन अब बात-बात में-या बिना बात के भी-अँगरेजी बोलता रहता है। या -या, येस-येस, वैरी गुड, गेट आउट, कम इन आदि-आदि तो वह नींद में भी बड़बड़ाता है। 

कई बार अफसर अफसरियत के नशे में इस कदर खो जता है कि दफ्तर के चपरासी से और घर के पालतू कुत्ते से भी अँगरेजी में बोलने लगता है। दफ्तर में तो उसे कोई टोक नहीं पाता लेकिन घर में उसकी एक अदद निजी बीवी हँसते हुए फरमाती है, कि डार्लिंग, तुम भी बड़े वो हो.अरे, अपना कुत्ता विदेशी नस्ल का जरूर है, लेकिन यह अँगरेजी नहीं समझ पाता। इशारे और ध्वनियों के सहारे सारे काम कर लेता है। तुम इससे अँगरेजी  बोल कर अपनी प्रतिभा का सत्यानाश मत करो।  अफसर शरमाते हुए कहता है-सारी डॉर्लिंग। जो अफसर जादू की कला में पारंगत हो जाते हैं, वे जीवन भर अद्भुत कमाल करते रहते हैं। उन्हें देख कर ही नए लड़के अपना लक्ष्य बना लेते है कि बड़े हो कर वे भी इस अफसर की तरह बनेंगे: जादूगर। यह किसी कमाल से कम नहीं होता, कि नौकरी की शुरुआत में जिस अफसर के पास केवल एक घर होता था, वह कुछ ही सालों में कई महलनुमा मकानों, दूकानों, होटलों, फार्म हाउसों आदि-आदि का मालिक हो जाता है। अफसर हाथ का कमाल दिखाता है और देखते ही देखते उसका घर नोटों से भर जाता है। बिस्तर के नीचे रुपइया, टायलेट की टाइल्सों के पीछे रुपइया, पालतू पशुओं के नाम पर सम्पत्ति। इसके नाम पर सम्पत्ति, उसके नाम पर सम्पत्ति, न जाने किस-किस के नाम पर सम्पत्ति। ऐसी भयंकर जादूगरी तो वे जादूगर बेचारे भी नहीं दिखा पाते जिनकी रोजी-रोटी जादू के सहारे चलती है। इसीलिए अपने देश में जो लोग कुछ ज्यादा ही समझदार हो जाते हैं, वे सब डॉक्टर या इंजीनियर, वकील, टीचर आदि नहीं, केवल धाँसू अफसर बनना चाहते हैं।

कितने मज़े हैं अफसर बनने में। ईमानदार अफसर बेचारे खाली हाथ आते हैं और खाली  हाथ चले जाते हैं। वे जादूगरी से दूर रहते हैं और हँसी के पात्र बनते हैं। मगर खुश रहते हैं। मगर जादूगर अफसरों का पूरा परिवार गद्गदायमान रहता है और मालेमुफ्त दिलेबेरहम की कहावत को चरितार्थ करता है। घर का राशन-पानी और बहुत-सा सामान न जाने कहाँ-कहाँ से तो फोकट में ही खिंचा चला आता है। न जाने कितने लोग घर पहुँच सेवा करते हैं और अपना टेढ़ा उल्लू सीधा करके धन्य होते रहते हैं। 

जादूगर अफसरों की रसोई का हर डिब्बा महीने के अंत में भी कभी खाली नहीं रहता। सदा भरा रहता है। उनके बच्चे धन्य होते हैं, बीवी भाग्य को सराहती है, कि ऐसा जादूगर पति मिला। किटी पार्टी और ब्यूटी पार्लर आते-जाते अफसर की बीवी के लिपिस्टिकदार अधरों पर केवल एक गीत ही रहता है जिसे वह मगन हो कर गाना गाती है- 

तेरे हाथों में क्या जादू है...। 

कुछ अफसर इतने बड़े जादूगर होते हैं, कि घोटाले करने के बाद अगर कभी फँस-फुसा भी गए तो अपने पास छिपा कर रखी गई सम्मोहन विद्या का ऐसा खतरनाक प्रयोग करते हैं, कि अंतत: घोटालों के आरोपों से भी बरी हो जाते हैं। याद करो अपने उस लाल को। याद आया? हाँ, याद आ गया न? लोग चकित रह जाते हैं, कि ये क्या चमत्कार हो गया। तब मजबूरी में उन्हें कहना पड़ता है- जै हो अफसर की।  घोटाला भी किया,  मुन्नी की तरह बदनाम भी हुआ,  फिर भी पद सलामत है? यह जादू नहीं, तो और क्या है?