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राज्य में धान की कतार बोनी का रकबा 2 लाख 75 हजार हेक्टेयर हुआ, डॉ. रमन ने थपथपाई किसानों और कृषि अमले की पीठ

Date : 09-Jul-18

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  • कमजोर मानसून से निपटने दी आधुनिक खेती की सलाह 

रायपुर (नवप्रदेश)। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित कृषि अनुसंधान केन्द्रों द्वारा धान बोने के नये और उन्नत तरीके विकसित करने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि इन संस्थाओं द्वारा ऐसी विधियां विकसित की जा चुकी है, जिनमें बोने के लिए कम पानी और कम बीजों की जरूरत होती है जबकि पैदावार भी ज्यादा मिलती है। मुख्यमंत्री आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता 'रमन के गोठ' की 35वीं कड़ी में आम जनता को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने रेडियो प्रसारण में प्रदेश के किसानों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नये कृषि उपकरणों के बारे में भी बताया। इसके साथ ही उन्होंने खेती में किसानों की मदद से लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। 

एक हजार से ज्यादा 'कृषि यंत्र सेवा केन्द्र स्थापित 

उन्होंने किसानों को बताया- राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में एक हजार से ज्यादा 'कृषि यंत्र सेवा केन्द्रÓ स्थापित किए जा चुके हैं, जहां खेत की तैयारी, बोनी, रोपाई से लेकर फसल कटाई तक के उपकरण किराए पर उपलब्ध रहते हैं। डॉ. सिंह ने किसानों से कृषि यंत्र सेवा केन्द्रों की सेवाओं का लाभ लेने की अपील की। डॉ. रमन सिंह ने कहा- प्रसन्नता का विषय है कि किसान भाईयों की जागरूकता और मेहनत से और कृषि अमले के प्रयासों से राज्य में धान की कतार बोनी का रकबा दो लाख 75 हजार हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है और इस वर्ष कतार बोनी का रकबा और ज्यादा होने की संभावना है। मुख्ममंत्री ने कहा- बोनी करने की इस विधि में न सिर्फ तीस से चालीस प्रतिशत बीजों की बचत होती है बल्कि बीज के ठीक नीचे आधार उर्वरक उपलब्ध होने से पौधे की बढऩे की क्षमता और सूखा सहन करने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने कहा- कतार विधि से बोनी के लिए राज्य में आवश्यक उपकरण 'सीड-ड्रिल' अनुदान पर उपलब्ध है। ऐसे इलाकों में जहां टेक्टर और अन्य उपकरण अपेक्षाकृत कम संख्या में हैं, वहां के लिए 'इंदिरा सीड-ड्रिल' और 'भोरमदेव सीड-ड्रिल' जैसे बैलों से चलने वाले कृषि यंत्र भी विकसित किए जा चुके है, ताकि सभी किसान इस विधि को अपना सकें।

'श्री विधि लाभकारी

 मुख्यमंत्री ने कहा- सिंचित क्षेत्रों में धान उत्पादन की 'श्री विधि लाभकारी है, जिसमें धान में 8 से 15 दिन के पौधों की रोपाई की जाती है तथा बाली बनने की अवस्था से पहले तक खेत में इतना ही पानी दिया जाता है कि नमी बनी रहे। खरपतवार नियंत्रण का कार्य नींदा-नाशक दवाओं अथवा नींदा-नियंत्रण के लिये विकसित यंत्र जैसे 'अंबिका पैडीवीडर एवं कोनोवीडरÓ का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा- पारंपरिक रूप से मेड़ों का उपयोग अरहर तथा तिल जैसी फसलों के उत्पादन हेतु लिया जाता रहा है। पुरानी मेड़ पर भी नाममात्र के उर्वरक एवं नींदानाशक के उपयोग से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा- इसके अलावा मेड़ों पर कम छायादार पौधे जैसे-मुनगा, सीताफल, पपीता जैसे फलदार पौधे लगाए जा सकते हैं, जो आपके भोजन में विटामिन एवं आवश्यक खनिज तत्वों की पूर्ति करेंगे।  उन्होंने रेडियो प्रसारण में बताया- राज्य सरकार ने किसानों के लिए 75 सौ यूनिट तक नि:शुल्क बिजली देने की सुविधा भी बढ़ा दी है। अब एक से अधिक पम्प तथा पांच हार्स पावर के ऊपर के पम्पों पर भी फ्लैट रेट से बिजली लेने का विकल्प खोल दिया गया है। हमने नि:शुल्क कृषि ऋण देने की पूरी व्यवस्था कर दी है, इसलिए किसान भाई बेधड़क होकर अपना काम करें, उन्हें किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। 

हल्की जमीनों में धान की मध्यम अवधि की किस्में बोएं

कृषि विशेषज्ञों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने खरीफ  मौसम में हल्की जमीनों पर 100 से 115 दिन में पकने वाली धान की किस्मों की बोआई करने की सलाह किसानों को दी है। कृषि विशेषज्ञों द्वारा आज यहां जारी विशेष कृषि बुलेटिन में कहा है कि धान की दंतेश्वरी, पूर्णिमा, इंदिरा बारानी धान-1, अनंदा, समलेश्वरी, एमटीयू-1010 तथा आई.आर. 36 किस्में 100 से 115 दिन के भीतर पक कर तैयार हो जाती है। उन्होंने कहा कि इन किस्मों के प्रमाणित बीज उपलब्ध न हो तो किसान स्वयं के बीजों को 17 प्रतिशत नमक के घोल एवं बाविस्टीन से उपचारित कर बोनी कर सकते हैं। कृषि बुलेटिन में यह भी बताया गया है कि कतार बोनी धान में बोआई के तीन दिन के अंदर अंकुरण पूर्व प्रस्तावित निंदानाशक पेण्डीमेथेलिन 1.25 लीटर की 500 लीटर पानी में घोल बनाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। शीघ्र एवं मध्यम अवधि की धान किस्मों की कतार बोनी करनी चाहिए। इनमें बियासी की आवश्यकता नहीं होती तथा धान की फसल 10-15 दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है। सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण के लिए अंकुरण पूर्व क्यूजोलाफाप-पी-एथिल, इमेजाथाइपर या पेन्डीमेथिलिन या मैट्रीबुजिन का छिड़काव अनुशंसित मात्रा में करना फायदेमंद होता है। उकठा रोग से प्रभावित क्षेत्रों में अरहर के साथ ज्वार की मिलवा खेती करने से अरहर में इस रोग का प्रकोप कम हो जाता है।