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 बच्चों के हौसले है बुलंद, नदी को पार कर जाते है स्कूल, शिक्षा की चाह में आड़े आ रही मुश्किलों भरी राह 

Date : 09-Jul-18

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कवर्धा (नवप्रदेश) ।  शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने कई अभियान चलाए हैं और निश्चित रूप से इसका असर भी दिखा है लेकिन आज भी कई क्षेत्र हैं जहां बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला पंडरिया विकासखंड से जुड़ा हुआ है, जहां आसपास के आधा दर्जन से भी अधिक गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान को जोखिम में डालकर नदी पार कर जाना होता है। ये स्थिति सीएम के गृहग्राम में बनी हुई है तो सुदूर स्थित स्कूलों की व्यवस्था का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। सिर्फ एक पुल ही नहीं बन पाने की वजह से वनांचल के लगभग ऐसे सात गांव के विद्यार्थियों के साथ-साथ आम लोगों को आए दिन परेशानियों से जूझना पड़ता है लेकिन इनकी परेशानियों की तरफ ना तो प्रशासन का ध्यान है और ना ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का।  गांव नेऊर में हाई स्कूल का संचालन किया जा रहा है जहां अपना भविष्य गढने के लिए ग्राम माहिडबरा, कुसियारी, बदना, घोघरा, कौवा नारा, कांदावानी, अमनिया से 160 से अधिक बच्चे कक्षा छठी से बारहवीं तक पढने के लिए जाते हैं लेकिन बरसात प्रारंभ होते ही इन बच्चों की परेशानी बढ़ गई है। परिजनों को हमेशा गंभीर हादसे होने की चिंता सताती रहती है।  पुलिया के अभाव में कन्हैया नदी को पार करने के लिए खुद की जान जोखिम में डालनी पड़ती है। विगत कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदल जाने के कारण बारिश का दौर प्रारंभ हो गया है जिसके कारण नदी नालों में जल स्तर बढने लगा है। स्कूल बच्चों को पढ़ाई करने के लिए जाने का एकमात्र रास्ता कन्हैया नदी को पार कर जाने का है ऐसे में पानी का स्तर बढने से उनकी चिंता बढने लगी है।

कई बार कर चुके हैं आवेदन

लोक सुराज में शिकायत को तत्काल मौके पर ही निराकरण करने का दावा भी खोखला साबित हो रहा है। जिले में आज भी कई ऐसे ग्राम पंचायत है जहां के लोग बारिश शुरू होते ही केवल जिला मुख्यालय से नही बल्कि ब्लॉक मुख्यालय से भी कट जाते हैं। इस संबंध में कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं लेकिन उस पर कोई सुनवाई आज तक नहीं हुई। 

मरीजों अस्पताल पहुंचने में होती है मुश्किल

बरसात में तो यह स्थिति पैदा हो जाती है कि नदी के उफान पर होने के चलते अगर कोई व्यक्ति गांव में बीमार पड़ जाए तो उसे उपचार के लिए अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सकता। ऐसी स्थिति में उक्त रोगी को उनकी किस्मत पर छोडने के लिए ग्रामीण मजबूर होते हैं।