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 बीजेपी आलाकमान को संघ ने सौंपी है एक खुफिया रिपोर्ट, चौंथी पारी की राह में पार्टी के 32 बन रहे रोड़ा!

Last Modified Aat : 08-Jul-18

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  •  बीजेपी को संघ की सलाह सूची में 6 मंत्री 26 विधायक वोट कटुआ

रायपुर(नवप्रदेश)। छत्तीसगढ़ में लगातार चौथी बार सरकार बनाने का सपना देख रही बीजेपी के लिए राह आसान नहीं है। संघ की एक खूफिया रिपोर्ट में साफ कहा गया है की सूबे की सरकार के  लिए चुनावी डगर इस बार मुश्किलों भरा है। इसकी वजह है पार्टी के आधा दर्जन मंत्री और दो दर्जन से ज्यादा विधायक। सत्तारुढ़ भाजपा को पार्टी के ही तकरीबन 32 विधायकों का व्यवहार चौंथी पारी के लिए सिरदर्द बना हुआ है। 

सरकार बनाने के लिए बीजेपी को 6 मंत्रियों समेत 26 विधायकों की टिकट काटना बेहद जरुरी है। संघ ने ये रिपोर्ट बीजेपी आलाकमान तक पहुंचा दी है। इस रिपोर्ट पर अब दिल्ली में मंथन और चिंतन दोनों ही चल रहा है। संघ के एक आला नेता के मुताबिक राज्य में न तो सरकार और ना ही बीजेपी के खिलाफ  कोई माहोल और आक्रोश है। जनता में यदि जरा सी नाराजगी है तो वो व्यक्ति विशेष और क्षेत्र में जनता के प्रति आचरण और व्यवहार को लेकर है। संघ ने अपने सर्वे में ऐसे 26 विधायकों और 6 मंत्रियों को चिन्हांकित किया है जिनके खिलाफ  क्षेत्र में जबरदस्त असंतोष है। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कह दिया गया है की ये नेता चुनाव जीत पाने की स्तिथि में बिलकुल नहीं है। इन व्यक्तियों की टिकट काट यदि नए चेहरे को बीजेपी अपना उमीदवार बनाती है तो चुनाव जीता जा सकता है। पार्टी के लिए मिशन-65 पर काम करना आसान हो सकता है। शॉर्टलिस्ट किये गए नेताओं के क्षेत्र में इस कदर लोग खफा हैं की यदि इन्हें टिकट दी गयी तो ये सीट बीजेपी के हाथों से निकल सकती है। साफ है कि राज्य में बीजेपी के मौजूदा 49 विधायक है ऐसे में यदि इस रिपोर्ट के मुताबिक टिकट वितरण होता है तो बीजेपी को कम से कम 32 विधायकों की टिकट काटनी पड़ेगी। अब बीजेपी को तय करना है की उसकी प्राथमिकता जनता के आक्रोश से बचने की है टिकट काटकर अपने उन नेताओं के गुस्से से बचना जिनकी वजह से जनता में पूरी सरकार को लेकर किरकिरी हो रही है।

इन वजहों से है सब खफा

  •  बदजुबानी 
  • वोटरों की अनदेखी
  • क्षेत्र में वक्त नहीं दिया
  • योजना का लाभ नहीं दिया 
  • परिजनों की दबंगई 
  • क्षेत्र की मांगों की अनदेखी
  • खराब छवि वालों को लेकर घूमना
  • रहन-सहन में बदलाव 
  • अदूरदर्शिता से कांग्रेस सक्रिय 
  • निष्क्रीयता और क्षेत्र के मुद्दे पर विधानसभा में चुप्पी