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कांग्रेस ने लगाया आरोप दिव्यांगों को योजना का नहीं मिल रहा सही लाभ

Date : 07-Jul-18

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  • सरकारी योजना से आत्मनिर्भर बन रहे दिव्यांग : रमशीला
  • योजना बनाकर क्रियान्वयन के लिए गठित की गई है कई संस्थाएं

रायपुर  (नवप्रदेश) । समाज कल्याण विभाग में चुनिंदा अधिकारियों के लंबे समय से जमे रहने तथा दिव्यांगों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा आज ध्यानाकर्षण के दौरान सदस्य अरूण वोरा तथा दलेश्वर साहू ने उठाया। दोनों ने अपने ध्यानाकर्षा में कहा कि समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य में समाज के कल्याण जैसे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने, नि:शक्तजनों की सहायता करने इत्यादि बहुत सी योजनाएं बनाई गई एवं उनके क्रियान्वयन के लिए अलग-अलग संस्थाओं का गठन किया गया है।  माना में ऐसा ही एक राज्य नि:शक्तजन स्त्रोत संस्थान (एसआरसी) संचालित है। एसआरसी के अन्य कार्यों के साथ-साथ मुख्य कार्य समाज कल्याण की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रशिक्षण देना है। यह संस्था अपने उद्देश्य में पूरी तरह विफल हो चुकी है, न ही ठीक से प्रशिक्षण दिया जा रहा है न ही विभाग की योजनाओं को प्रसार-प्रसार किया जा रहा है, जिससे जनता को शासन की योजनओ का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस विभाग में कुछ विशेष चहेते लोगों को अपकृत करने नियमों का पालन न करते हुए अपने अस्थायी पद से दो-दो पद ऊपर सीधे नियुक्ति दे दी गई है। इसके प्रमुख जीएम के पद पर अपने चहते अधिकारी को लंबे समय से पदस्थापना की गई है। नि:शक्तजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। अपने निरिंकुश रवैये के कारण यह दस्तवेजों में भारी छेड़छाड़ की गई तथा ऑडिट में पाई गई कमियों को भी दबा दिया गया।  उपरोक्त दोनों संस्थानों में उनके संचालन के लिए निर्धारित नियम एवं प्रक्रियाओं का गंभीर उल्लंघन करते हुए भारी पैमाने पर अनियमितता की गई एवं नि:शक्तजनों, दिव्यांगों एवं समाज के कमजोर तबकों को उनके मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया गया है। शासन प्रशासन द्वारा ऐसे अनियमितता करने वाले दोषी अधिकारियों  के विरूद्ध कार्यवाही नहीं कर उनहें संरक्षण प्रदान किया जा रहा है और अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदारी वाले पदों पर पदस्थापना किया जा रहा है जिससे उनके हौंसले और बुलंद हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों और नि:शक्तजनों और समाज के कमजोर लोगों में शासन प्रशासन के इस रवैये से भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।  अपने वक्तव्य में मंत्री रमशीला साहू ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि यह कहना सही है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य में समाज कल्याण से संबंधित जैसे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने दिव्यांगजनों की सहायता करने, इत्यादि हेतु बहुत सी योजनाएं बनाई गई है और उनके क्रियान्वयन के लिए अलग-अलग संस्थाओं का गठन किया गया है। यह कहना भी सही है कि, ऐसी एक संस्था राज्य नि:शक्तजन स्त्रोत संस्थान भी है। यह कहना सही है कि, यह नि:शक्तजन स्त्रोत संस्थान अन्य कार्यों के साथ-साथ समाज कल्याण की योजनाओं हेतु प्रशिक्षण देना एवं प्रचार-प्रसार करना है। यह कहना सही है कि, यह संस्था अपने उद्देश्य में पूरी तहर विफल हो चुकी है। वरन यह सही है कि, इस वर्ष ही 12 प्रशिक्षण दिये जा चुके हैं। साथ ही वित्तीय उपलब्धता के आधार पर योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जाता है। जिसके कारण जनता को लाभ मिल रहा है। विगत वित्तीय वर्ष में लगभग सभी योजनाओं का लक्ष्य पा लिया गया था और इस वर्ष भी सभी योजनाओं में सुचारू रूप से कार्य चल रहा है। 

यह कहना सही नहीं है कि, काम मात्र कागजों में है और ऑडिट नहीं कराया गया है। वरन यह सही है कि संस्थान का ऑडिट वर्ष 2016-17 तक हो चुका है और अभी वर्ष 2017-18 का प्रचलन में है। यह कहना सही नहीं है कि कुछ विशेष चहेते लोगों उपकृत करने हेतु नियमों का पालन न करते हुए अपने अस्थायी पद से दो पद ऊपर सीधे नियुक्त दे दी गई है वरन् सही यह है कि, कार्यकारी निदेशक के संविदा पद के विरूद्ध विभागों के वरिष्ठ पद से संबंधित संस्थान का प्रभारी दिया जाता रहा है। यह कहना सही नहीं है कि, विभाग की उत्थान जैसी योजनाओं दम तोड़ते हुए निरंकुश रूप से काम कर रही है। वरन वस्तुस्थिति यह है कि, इस पर नियम निर्देश बनाने की कार्यवाही प्रचलन मे है। 

यह कहना सही है कि, राज्य के नि:शक्तजनों को आर्थिक सहायता प्रदान कर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने हेतु छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास  निगम संचालित है। इसके वर्तमान प्रहाप्रबंधक लम्बे समय से इस पद से अतिरिक्त प्रभार पर है। यह कहना सही नहीं है कि चहेते अधिकारी की पदस्थापना की गई है तथा रिश्वत लेकर आर्थिक सहायता प्रदान की गई है व नि:शक्तजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वरन वस्तुस्थिति यह है कि लगभग 2400 से अधिक लोगों को लगभग रूपये 60 करोड़ से अधिक का ऋ ण स्वीकृत किया गया है और इस हेतु निगम के श्रेष्ठ चैनेलाइजिंग इजेंसी का 2 बार क्रमश: 2010 एवं 2016 में राष्ट्रीय पुरस्कार महामहिम राष्ट्रपति जी के हाथों प्राप्त हुआ है। 

यह कहना भी सही नहीं कि, ऑडिट की कमियों को भी दबा दिया गया। वरन वस्तुस्थिति यह है कि , वर्ष 2015-16 तक ऑडिट महालेखाकार द्वारा नियुक्त चार्टेउ एकाउन्टेट द्वारा किया जाकर रिपोर्ट महालेखाकार छत्तीसगढ़ को दी जा चुकी है, इसमें कोई गंभीर अनियमितता नहीं पायी गयी है। महालेखाकार, छत्तीसगढ़ द्वारा नियुक्त चार्टेड एकाउन्टेट द्वारा वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 का ऑडिट प्रचलन में है। 

यह कहना सही नहं है कि उपरोक्त दोनों संस्थाओं में उनके संचालन के लिए निर्धरित नियम एवं प्रक्रियाओं का गंभीर उल्लंघन करते हुए भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया और नि:शक्तजनों, दिव्यांगों एवं समाज के कमजोर तबकों को उनके मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया गया। यह कहना सही नहीं है कि शासन प्रशासन द्वारा ऐसी अनियमितता करने वाले दोषी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाहीं नहं कर उन्हें संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। वरन सहीं यह है कि, उन पर कार्यवाही प्रचलन में है। यह कहना भी सही नहीं है कि, अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदार वाले पदों पर पदस्थ किया जा रहा है, जिससे उनके हौंसले और बुलंद हो रहे हैं। अत: यह कहना सहीं नहीं है कि छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों, नि:शक्तजनों और समाज के कमजोर लोगों में किसी भी प्रकार का  रोष और आक्रोश व्याप्त है।