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बसपा और जकांछ सुप्रीमो के बीच हुई प्रदेश की 10 एससी सीटों पर चर्चा

Last Modified Aat : 05-Jul-18

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  • पुनिया-भूपेश चुक गए तो जोगी को मिल गईं माया 
  • गठबंधन का फिट बैठा गणित तो कांग्रेस होगी डैमेज

रायपुर (नवप्रदेश) । छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री व छजकां प्रमुख अजीत जोगी अपनी सियासी चालें तेज कर दिये हैं। इंडियन पॉलिटिक्स की हार्ड बार्गनर कही जाने वालीं बसपा सुप्रीमो मायावती से डेढ़ घंटे की मुलाकात रंग दिखाने लगी है। हालाकि जोगी से पहले उनके सूबाई सियासत के धुर विरोधी पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने 3 महीने पहले ही बसपा के साथ संभावनाओं को जाहिर कर दिया था। भूपेश के बाद प्रदेश प्रभारी पीएल.पुनिया की वजह से भी मायावती से मिलाप की उम्मीदें कांग्रेस को थी। परंतु दोनों ही कांग्रेसी दिग्गजों को एक बार फिर जोगी ने सियासी चाल में शिकस्त दे दी है। दिल्ली में चाय की चुस्कियों के साथ ही जोगी-माया की लंबी मुलाकात और दोनों के चेहरों की खुशियां इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का भविष्य बिगाड़ सकती हैं। हालाकि अब तक सूबे की सियासत भाजपा-कांग्रेस तक ही सिमटी थी। अब जोगी कांग्रेस के वजूद में आने के बाद होने वाला नुक्सान कांग्रेस को था जिसे झेल लेने का माद्दा भूपेश, टीएस. और पीएल पुनिया ने जताया था। अब बसपा से अगर जोगी कांग्रेस का गठबंधन होता है तो कांग्रेस समेत भाजपा के लिए एससी सीट में लड़ाई कठीन होगी। हालाकि जब जोगी कांग्रेस में तब चुनाव में सूबे की 10 एससी सीट में कांग्रेस को सिर्फ 1 ही मिली थी। परंतु इस बार जोगी-माया मुलाकात के बाद एससी सीटों में भाजपा-कांग्रेस की नाव हिचकोले मार सकती है। दिसंबर में प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनाव में गठजोड़ के मद्देनजर इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। साथ ही भूपेश और पुनिया के मायावती से मुलाकात में पिछडऩे को लेकर भी बातें होने लगी हैं। 

वैसे बसपा राज्य गठन के बाद 1-2 सीटों से आगे कभी बढ़ नहीं पाई है।  प्रदेश में एससी समुदाय के मतदाताओं में बसपा का महज 6 से 7 प्रतिशत ही पार्टी की पैठ है अब जोगी की मुलाकात के बाद वोट-सीट दोनों का गणित बनने से इंकार नहीं किया जा सकता। हालाकि एससी मतदाताओं का रूख क्या होगा इसका ठीक अनुमान लगाना फिलहाल कठिन है। यह भी माना जा रहा है कि एससी वोटो का रूझान जोगी की ओर हो सकता है। कांग्रेस के लोग एससी सीटों के सवाल पर कहते हैं कि पिछले चुनाव में केवल एक सीट मिली लेकिन इस बार जोगी के दांवपेंच से भाजपा को नुकसान हो सकता है। उन्हें अपनी सीटें बचाने की चुनौती है।

चर्चा यह भूपेश नहीं पुनिया से हैं माया खफा

जोगी-माया मुलाकात की बात सार्वजनिक होने के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस में अपने आला नेताओं को लेकर तरह तरह की बातें शुरु हो गई हैं। पीसीसी चीफ भूपेश का बसपा सुप्रीमो से मिलने में नाकाम रहना जितना नहीं खटक रहा पार्टी नेताओं को उससे ज्यादा इसमें प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया को इसका दोष दिया जा रहा है। कांग्रेस के जानकारों की मानें तो पीएल पुनिया उत्तर प्रदेश में मायावती के सीएम कार्यकाल में चेहते आईएएस थे। मायावती ने रिटायरमेंट के बाद पुनिया को बसपा भी ज्वाइन करवाया था। एससी वर्ग के आईएएस अफसर को बसपा ने हाथों हाथ लिया था। परंतु पीएल एक ही झटके में बसपा से कांग्रेस में आ गए और मायावती से वे दूर हो गए। वैसे भी गठबंधन जैसे मामले में मायावती भूपेश के कद से ज्यादा बड़ा नेता या फिर सीधे सोनिया और राहुल के थ्रू ही बात करतीं। इस मामले में छजकां सुप्रीमो ने बाजी मार ली।

पुनिया को माया से छीन लाईं थी मोहसिना

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसिना किद्वई ने ही मायावती की पार्टी बसपा से छीनकर पीएल पुनिया को कांग्रेस पार्टी में लाई थीं। बताते हैं कि सोनिया गांधी से मुलाकात करवाने और पुनिया को कांग्रेस ज्वाइन करवाने में इनका अहम किरदार था। कांग्रेस की टिकट पर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से सांसद भी बने थे पीएल पुनिया। बता दें कि यूपी के बाराबंकी में ही मोहसिना किद्वाई का विवाह हुआ है और उनका ससुराल यहीं है। इन सब बातों से बसपा सुप्रीमो मायावती अब भी पुनिया से खफा-खफा रहती हैं। वहीं पुनिया भी मायावती के कभी इतने करीबी थे पर वे अजीत जोगी से पहले मायावती को लाइनअप नहीं कर पाए।

जोगी की लिस्ट में सीपीआई-सीपीएम भी 

दिल्ली में बसपा सुप्रीमो मायावती से यादगार मुलाकात के बाद अजीत जोगी बेहद खुश हैं। वहीं पार्टी के नेताओं ने भी इस मुलाकात को दोनों ही दल के लिए अच्छा बताया हैं। तस्वीरें जो सामने आई है उसे देखकर भी सियासतदां दोनों प्रमुख नेताओं के हाव-भाव देखकर कयास लगाने लगे हैं। गठबंधन की राजनीतिक कड़ी में पार्टी के नेता बताते हैं कि मायवाती से मुलाकात के बाद अब अजीत जोगी सीपीआई और सीपीएम के नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं। चूंकि सीपीआई का बस्तर और सीपीएम का दुर्ग-भिलाई के साथ सरगुजा के कुछ सीटों में प्रभाव है लिहाजा वहां से भी समीकरण तैयार किए जा सकते हैं। स्वास्थ्यगत कारणों से अस्पताल में दिन बीतने से अब जोगी प्लान चेंज कर कांग्रेस को सत्ता से दूर करने और बीजेपी को बड़ा डैमेज करने के लिए सूबे में बसपा, सीपीआई, सीपीएम, गोंडवाना गणतंत्र समेत अन्य दलों से गठबंधन करने की रणनीति बना रहे हैं। संभवतया दिल्ली से रायपुर लौटने से पहले या कुछ दिन में ही वे ऐसा कर सकते हैं। 

अमित ने कहा सौजन्य भेंट, कौशिक ने कहा दोनों हैं खाली

बसपा-छजकां सुप्रीमो  की मुलाकात पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने टांट मारा है। न्यू सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कौशिक ने कहा कि दोनों मुख्यमंत्री रहे हैं, अब दोनों खाली हैं, इसलिए आने वाली रणनीति पर चर्चा हो रही होगी। मरवाही विधायक अमित जोगी ने दोनों की मुलाकात को सौजन्य भेंट बताया है. इसे लेकर कौशिक का कहना है, 'एक कांग्रेस के नेता का बयान आया था, हमको सत्ता के लिए जो गठबंधन करना है, वो गठबंधन करेंगे। शायद इसलिए कांग्रेस गठबंधन में बाजी न मार ले करके जोगी मिले होंगे। चुनाव नजदीक है, इसलिए स्वाभाविक रूप से कयास लगाए जा रहे हैं