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पूर्व विधायक योगेश्वर राज सिंह ने दिया समर्थन, रेल की सौगात से कही वांचल वासी न हो वंचित

Date : 04-Jul-18

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  • कवर्धा रेलवे लाइन से बैगा आदिवासी हैं वंचित, शासन प्रशासन का आर्थिक श्रोत पर ध्यान नही
  • छठवें दिन भी क्रमिक भूखहड़ताल जारी

कवर्धा । राट्रीय मानव बैगाओं को विशेष पिछडी जनजाति के रूप पहचान सरकार और प्रशासन कर रखी है ।जिले के उत्तर भाग मे इनकी बसाहट है ।सर्व आदिवासी समाज के लोग भी इसी दिशा मे अधिकतर निवास रत है ।जन संख्या के अधार पर  इनकी आबादी कबीरधाम मे 30-32प्रतिशत है ।उन्हें वर्तमान प्रस्तावित रेलवे लाइन का लाभ से वंचित रखा जा रहा है । शासन प्रशासन के जनजाति विकास के संबंध मे ढोल पटते नजर आते हैं किन्तु क्षेत्र के नेता, जनप्रतिनि, राजनेताओं को क्यों बात समझ नही आ रहा है । कि जिले मे प्रस्तावित नयी रेलवे लाइन का लाभ आदिवासियों को नही मिल रहा है । मूल सर्वे जिसमें लोरमी -कन्तेली,पण्डरिया, पाण्डातराई, पोडी, बोडला से गुजरकर डोंगरगढ़ जबलपुर जाने की बात थी । इस क्षेत्र मे रेलवे की आर्थिक श्रोत बाक्साइट, चुना पत्थर, डोलोमाइट, शक्कर कारखाना पण्डरिया, बोडला मिलने के साथ ही धार्मिक दार्शनिक स्थल गौरकांपा,बम्बहनदेइ,बकेला पार्श्वनाथ,कंकालिन , छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव भी इसी रुट मे ही है । बाउजूद इस मार्ग से वचिंत रखने का काम किया जा रहा है । पण्डरिया विधानसभा के उत्तर दिशा मे ही वनांचलवासी,वनवासी-आदिवासी पहाडी क्षेत्र पर बसे हैं ठीक इसी प्रकार कवर्धा विधानसभा के बोडला विकास खण्ड मे भी आदिवासी रहते हैं । इन्हें रेलवे की आवश्यकता है आवागमन के साधन के अभाव मे वनस्पति से मिलने वाली लाभ नही मिल पाता है । आज भी आजादी के 71 साल मे वस्तुविनमय के अधार पर उपज बेचने मजबूर हैं । उन्हें रेलवे की लाभ से वंचित रखना भी पूर्णतः गलत लगता है । अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग की संख्या बहुतायत है । ब्यापारिक केंद्र शहरी क्षेत्र भी है । ये सभी बातें जानने के बाद भी क्षेत्र लोगों के साथ अन्याय हो रहा है । इन्हीं सभी बातों को ध्यान मे रखकर रेलवे संघर्ष समिति पण्डरिया मूल सर्वे के अधार पर रेलवे लाइन बनाने की मांग को लेकर 6वे दिन भी क्रमिक भूखहड़ताल धरना आनदोलन पर बैठी है । 2-6-2018 के मुख्य अनसनकारी नवीन जायसवाल, पालनसिंह बैश अपने अन्य साथी हैं।