nav Pradesh logo

संपादकीय : अफवाह रोकने कारगर पहल जरूरी

Last Modified Aat : 04-Jul-18

News image
<

संपादकीय : अफवाह रोकने कारगर पहल जरूरी

पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सहित देश के आधा दर्जन राज्यों में बच्चा चोर के अफवाह के चलते कई लोगों की भीड़ ने बेदम पिटाई कर उनको मौत के मुंह में पहुंचा दिया है। ये सारी घटनाएं सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं, अफवाहों का दुष्परिणाम है। कहा जाता है की भीड़ का कोई दिमाग नहीं होता। एक व्यक्ति के हिसंक होते ही पूरी भीड़ हिसंक बन जाती है। इसके पूर्व भी टोनही की अफवाह के चलते कई निर्दाेष महिलाओं को भीड़ ने प्रताडि़त किया था जिससे अनेक महिलाओं की मौत भी हो गई थी। आज के आधुनिक युग में इस तरह की अफवाहें समाज में अराजकता का माहौल निर्मित करती है। बच्चा चोर गिरोह की अफवाह को लेकर जो तथ्य सामने आ रहे है उसके मुताबिक एक विडियों वायरल किया जा रहा है। जो पाकिस्तान का है उसे भारत में कुछ सरारती तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से फैला कर भीड़ को हिंसक बना रहे है। बच्चा चोर के शक में न सिर्फ महिलाओं को बल्कि पुरूषों को भी निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे पीडि़त व्यक्ति की भीड़ फरियाद नहीं सुनती बस उसे पीटने लगती है। इस तरह की घटनाओं की पुर्नरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को चाहिए कि वह अफवाह फैलाने वालों की नाक में नकेल कसने के लिए कारगर पहल करे। सोशल मीडिया पर भी अंकुश लगाना अतिआवश्यक है। क्योंकि इस तरह की अफवाहें सोशल मीडिया के माध्यम से ही जंगल में आग की तरह फैलती है। प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए तो दिशा-निर्देश सरकार ने जारी किए है और इसके लिए प्रेस कांउसिल ऑफ इंडिया जैसी संस्था भी है किन्तु सोशल मीडिया के दुरूपयोग को रोकने के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं किया गया है। अब समय आ गया है कि सोशल मीडिया पर भी अंकुश लगाने के लिए सरकार उचित कदम उठाए।