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 प्रसुता के पति ने सरकारी अस्पताल के व्यवस्था पर उठाया सवाल , कहा समय पर ईलाज नहीं मिला तो डाँ शैलेष ने समय पर ईलाज कर बचाया उसकी पत्नी की जान

Last Modified Aat : 04-Jul-18

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देवभोग। सरकारी अस्पताल के व्यवस्थाओं पर कदलीमुड़ा के एक युवक ने फिर सवाल खड़ा किया है .कदलीमुड़ा निवासी निरंजन नागेश ने बताया कि 1 जुलाई की सुबह करीब साढ़े पांच बजे उसकी पत्नी रत्ने बाई को प्रसव पीड़ा हुई,इसी दौरान वह अपनी पत्नी को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवभोग पहुंचा,निरंजन के मुताबिक अस्पताल में कोई भी डाक्टर और नर्स मौजूद नहीं था.वहीं एक ही पुरूष नर्ष उपस्थित था.वहीं सरकारी अस्पताल में डाक्टर नहीं होने के चलते निरंजन और उसका परिवार बहुत ज्यादा निराश हो गया.इसके बाद उन्होंने धमर्गढ़ ले जाने का निर्णय लिया.निरंजन के मुताबिक जब वह उसकी पत्नी को धमर्गढ़ ले जा रहा था.इसी दौरान अचानक बीच रास्ते में ही उसकी पत्नी की तबियत बिगडऩे लगी.पत्नी के बिगड़ते स्थिति को देखने के बाद उसने देवभोग सीएससी में पदस्थ डाँ शैलेष दौरा के निवास में जाकर मदद की गुहार लगाई.वहीं निरंजन ने शपथ पत्र में दिए गए बयान में बताया है कि उसके साथ ही उसके परिजनों द्वारा लगाइ गई गुहार को ध्यान में रखते हुए डाँ दौरा ने प्रसूता का चेकअप शुरू किया.चेकअप के दौरान उन्होंने बताया कि बच्चे का सिर बाहर निकल गया है और गर्दन फंसा हुआ है.ऐसी स्थिति में बच्चे को निकालने में डाँ दौरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.मामले में निरंजन ने बताया कि डाँ शैलेष ने सही समय में कदम उठाकर जच्चा-बच्चा की रक्षा की है.निरंजन के मुताबिक जब मरीज की स्थिति सामान्य हो गई थी.इसके बाद डाँ दौरा ने आवश्यक दवाई देकर शासकीय अस्पताल में भर्ती होकर ईलाज कराने के साथ ही शासन का स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए प्रसूता के परिजनों को सलाह दिया.

प्रसूता के पति के आरोप को सिरे से बीएमओ ने किया खारिज-:मामले में बीएमओ डाँ सुनील भारती ने बताया कि प्रसूता जब अपने परिजनों के साथ सीएससी पहुंची तो इस दौरान ड्यूटी पर डाँ शैलेष दौरा की ड्यूटी थी.डाँ भारती ने मेल स्टाफ टीकम सिंह के हवाले से बताया कि टीकम द्वारा डाँ दौरा को सूचना दी गई थी.उन्हें यहां आकर प्रसव कराया जाना था.लेकिन उनके द्वारा अपने निवास में बुलाकर असुरक्षित प्रसव कराया गया.भारती ने बताया कि मामले में प्रसूता के परिजनों के बयान के आधार पर उन्हें नोटिस भेज कर घर पर प्रसव कराने की वैधता व अनुपस्थिति का कारण पूछा गया है.मौके पर मौजूद स्टाफ से मिली जानकारी के हवाले से बीएमओ ने बताया कि जिस वक्त प्रसूता यहां पहुंची तो बेहोश होकर गिर गई थी.खुन काफी मात्रा में बह चुका था.गर्भस्थल के नीचे खुन के थक्के जम गए थे. जो प्रसूता के लिए जानलेवा साबित हो सकता था.

मुझे फंसाने के लिए रचा जा रहा झूठा साजिश-: डाँ शैलेष दौरा ने बीएमओ डाँ भारती के दावों को झूठा करार दिया है.डाँ दौरा के मुताबिक जब ड्यूटी चार्ट में उनका नाम नहीं था,तो कैसे उनकी ड्यूटी होना बीएमओ बता रहे है,यह समझ से परे है.डाँ दौरा ने कहा कि उनकी ड्यूटी नहीं थी और फंसाने के लिए झूठा साजिश रचा जा रहा है.डाँ दौरा ने बताया वे विदेश से पढ़ाई कर लौटे है.वहां उन्हें यह सिखाया गया है कि डाक्टर का सबसे बड़ा धर्म होता है कि किसी भी परिस्थिति में लड़कर मरीज की जान की रक्षा की जाए.उन्होंने बताया कि उनके पास एक व्यक्ति अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए गुहार लगाने आया था.उन्होंने अपने पेशे का सम्मान करते हुए मरीज की जान बचाने के लिए कदम उठाया.डाँ शैलेष के मुताबिक यदि उन्होंने मरीज की जान बचाकर कोई गलती की है,तो वे गलत है.उन्होंने बताया कि वे हमेशा मरीज की जान बचाने के लिए हर परिस्थिति से लडऩे को तैयार है.

प्रसूता के पति ने डाँ पर लगाए गए आरोपों का किया खंडन-: कदलीमुड़ा निवासी निरंजन नागेश ने डाँ शैलेष दौरा के उपर लगाए गए आरोपों का खंडन शपथ पत्र भरकर किया है.प्रसूता के पति ने बताया डाँ दौरा ने सुरक्षित प्रसव करवाकर डिलवरी करवा दिया था.वहीं उनके सलाह के अनुरूप निरंजन की पत्नी सुरक्षित अस्पताल पहुंच गई थी.वहीं सुबह करीब साढ़े छह बजे भर्ती किया गया था.निरंजन के मुताबिक भर्ती के समय उसकी पत्नी की स्थिति सामान्य थी.वहीं सामान्य रूप से बातचीत भी कर रही थी.वहीं भर्ती के दौरान अस्पताल में कोई भी डाक्टर मौजूद नहीं था.वहीं निरंजन ने आरोप लगाया कि डाक्टर नहीं रहने के कारण उसकी पत्नी का ईलाज समय पर नहीं हो पाया.वहीं ईलाज के अभाव में लगभग सुबह 9 बजे अस्पताल के पीएनसी वार्ड में बिना ईलाज के कारण निरंजन की पत्नी रत्ने बाई बेहोश हो गई.वहीं पत्नी की बिगड़ती हालत को देखकर निरंजन ने डाँ दौरा को फोन किया.वहीं समय पर डाँ दौरा पहुंचे और निरंजन की पत्नी की जान बचाए.वहीं बीएमओ ने निरंजन नागेश के सारे आरोपों का खंडन करते हुए बताया कि डाँ दौरा की ड्यूटी थी,लेकिन उन्होंने अपने ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती.