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सदन में गरमाया डर्टी सीडी कांड के आरोपी रिंकू खनूजा सुसाइड केस

Last Modified Aat : 03-Jul-18

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  •  हंगामे और निलंबन के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित
  •  कांग्रेस का आरोप सुसाइड नहीं मर्डर है

रायपुर। मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गयी। इससे पहले विपक्ष ने सोमवार को कथित अश्लील सीडी मामले में जांच की रफ्तार और संदेही रिंकू खनूजा की आत्महत्या के मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। नारेबाजी के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा की परंपरा के मुताबिक कांग्रेसी विधायक स्वंयमेव निलंबित हो गये। 

कांग्रेस ने खनूजा की मौत को सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए स्थगन पेश कर चर्चा की मांग की, लेकिन आसंदी ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्ष ने हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए रिंकू खनूजा की मौत मामले में जांच कराए जाने की मांग की। विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि रिंकू खनूजा की पत्नी ने एसपी को पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है और इस आत्महत्या मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस की भूमिका बेहद संदिग्ध है। बघेल ने कहा कि अब तक इस मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश नहीं की है। प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और ये बेहद गंभीर मामला है। टी एस सिंहदेव ने इस मामले में कहा कि रिंकू खनूजा की मौत मामले की जांच पुलिस कर रही है जबकि रिंकू की मौत सीबीआई पूछताछ के दौरान हुई है। भूपेश बघेल ने रिंकू खनूजा की मौत पर संदेह जताते हुए कहा कि उसकी मौत सीबीआई से पूछताछ के बाद हुई है, इस मामले में पुलिस जांच कर रही है, लेकिन जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। भूपेश ने सवाल उठाया कि अब तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट क्यों पेश नहीं की गयी। भूपेश ने कहा कि रिंकू खनूजा की पत्नी ने एसपी को पत्र लिखा है, ये आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है, इसकी विस्तृत जांच की जानी चाहिये।

गौरतलब है बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड मामले में सीबीआई जांच के घेरे में आने के बाद रिंकू खनूजा की कथित आत्महत्या पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मामले पर बोलते हुए प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा कि सीबीआई केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली संस्था है। सीबीआई जिस मामले की जांच कर रही है, उसकी चर्चा सदन में नहीं कराई जा सकती। जो मामला विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, उस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती है।