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पीएम मोदी के ब्रिक्स अजेंडा में सीमा पार आतंकवाद पर रहेगा जोर

Last Modified Aat : 02-Jul-18

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नईदिल्ली । इस महीने के अंत में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले बिक्स सम्मेलन में सीमा पार से किया जा रहा आतंकवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्य अजेंडा हो सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पिछले सप्ताह ब्रिक्स की सुरक्षा बैठक के लिए डरबन गए थे। वहां उन्होंने मजबूती से भारत का पक्ष रखते हुए कहा था कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद को रोकने के लिए आवश्यक प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। कूटनीतिक सूत्रों ने बताया कि अन्य ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सलाहकारों के साथ की गई बैठक में डोभाल ने कहा कि यह पता लगाने का रास्ता तलाशा जाना चाहिए कि आखिर आतंकवाद की नर्सरी चला रहे देशों ने अपनी धरती से उनके खात्मे के प्रयास किए हैं या नहीं। पिछले साल हुए बिक्स सम्मेलन में भारत की बड़ी कामयाबी यह थी कि उसके घोषणापत्र में आतंक के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम लिया गया था। यह सब रूस की मदद से हो पाया था। 2016 में गोवा में हुए सम्मेलन में चीन के विरोध के बाद इन समूहों का नाम नहीं लिया जा सका था। भारत ने इस साल ब्रिक्स की तैयारी बैठकों में भी घोषणापत्र में लश्कर और जैश का नाम लिए जाने पर जोर दिया है। हालांकि, जियामेन घोषणापत्र जल्द ही दिसंबर 2017 में आरआईसी (रूस, भारत, चीन) की संयुक्त समिति द्वारा उलट दिया गया। इसमें इन्हीं समूहों के नाम का जिक्र नहीं था। हालांकि इसमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ निर्णायात्मक कदम उठाने की बात कही गई थी।