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 निकाह हलाला और बहुविवाह के खिलाफ याचिका पर तुरंत सुनवाई की गुहार पर विचार करेगा सुको

Date : 02-Jul-18

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नई दिल्ली । मुस्लिम धर्म में प्रचलित निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई की सुप्रीम कोर्ट में मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस गुहार पर वह विचार करेंगे। याचिकाकर्ता की ओर से इस बारे में मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा को वह मामले को देखेंगे। हालांकि सोमवार को कोई तारीख तय नहीं की गई।

इसी दौरान केंद्र सरकार की ओर से अडिशनल सलिसिटर जनरल ने कहा कि इस मामले में जवाब दाखिल करेंगे। याची की ओर से वकील वी शंकर ने मामला उठाया और कहा कि संवैधानिक बेंच को मामले की सुनवाई करनी है मामले की जल्दी सुनवाई होनी चाहिए। वहीं एक अन्य वकील ने कहा कि एक याचिकाकर्ता पर दबाव डाला जा रहा है ऐसे में वो याचिका वापस लेने पर विचार कर रही है। मामले की तत्काल सुनवाई की जरूरत है। 

बता दें कि 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला और बहुविवाह के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया था। इस मामले में तुरंत सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लागई गई थी और कहा गया था कि जिस तरह से गर्मी की छुट्टियों में तीन तलाक मामले की सुनवाई हुई थी उसी तरह इस मामले की सुनवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने पहले से संवैधानिक बेंच रेफर कर रखा है।

निकाह हलाला, बहुविवाह आदि को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और इसे असंवैधानिक करार देने की गुहार लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच इसकी समीझा करेगा। सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर चार अर्जी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि निकाह हलाला और बहु विवाह संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार), 15 (कानून के सामने लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं) और अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को गैर संवैधानिक घोषित करते हुए कहा था कि यह धर्म का अभिन्न अंग नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के सामने एक बार में तीन तलाक. बहु विवाह और निकाह हलाला तीनों मुद्दे थे लेकिन तीन तलाक को गैर संवैधानिक घोषित किया गया था लेकिन बाकी मुद्दों को बाद में डील करने की बात कही गई थी लेकिन फैसले में मामले का निपटारा बताया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि पर्नसल लॉ पर कॉमन लॉ की वरीयता है और कॉमन लॉ पर संवैधानिक कानून की वरीयता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीन तलाक धार्मिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं है। 

निकाह हलाला और बहुविवाह को गैर संवैधानिक ठहराने के आधार 

निकाह हलाला और बहु विवाह को गैर संवैधानिक घोषित करने के लिए तमाम आधार गिनाते हुए याचिकाकर्ता ने कहा है कि ये संविधान के अनुच्छेद का उल्लंघन करता है।

-सुप्रीम कोर्ट ने जब एक बार में तीन तलाक को गैर संवैधानिक करार दिया था तब कहा था कि शरियत एक्ट की धारा-2 के तहत एक बार में तीन तलाक गैर संवैधानिक है। धारा-2 इसको मान्यता देता था। इसी तरह धारा-2 निकाह हलाला और बहु विवाह को मान्यता देता है जिसे गैर संवैधानिक घोषित किया जाए।