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संपादकीय : दरिंदों को फांसी की सजा दो

Date : 02-Jul-18

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मंदसौर में एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी में निर्भया कांड की याद दिला दी है। आठ साल की मासूम बच्ची के साथ जो हैवानियत हुई है उससे सारे देश का दिल दहल गया है। मंदसौर में लोगों का गुस्सा फूटा। यह गनीमत है कि उग्र भीड़ ने अपना आपा नहीं खोया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया है कि इन दोनों दरिंदों को फांसी की सजा दिलाने के लिए सरकार अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। देश की राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद सरकार ने दुष्कर्मियों को कड़ी सजा देने के लिए कठोर कानूनी प्रावधान जरूर किये है लेकिन उसके बाद भी मासूम बच्चियों के साथ रेप की घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। ऐसा लगता है कि कानून का खौफ ही नहीं है। मंदसौर की घटना के बाद अब एक बार फिर लोग ऐसे दरिंदों को फांसी की सजा देने की पुरजोर मांग कर रहे है। सरकार को चाहिए कि वह बलात्कारियों को सजा ए मौत देने के लिए कानून में संशोधन करे और ऐसे मामले प्राथमिकता के आधार पर फास्ट ट्रेक कोर्ट में निपटाए जाए। फास्ट ट्रेक कोर्ट की सजा के खिलाफ ऐसे दुष्कर्मियों की अपील पर भी हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट त्वरित फैसला ले ताकि ऐसे दरिंदों को उनके किये की सजा जल्द से जल्द मिल सके। जब तक ऐसा नहीं किया जाएगा इन हैवानों में कानून का खौफ पैदा नहीं होगा और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति पर रोक नहीं लग पाएगी। इसके साथ ही बेटियों की सुरक्षा के लिए भी सरकार को कारगर कदम उठाने होंगे। यदि किसी बच्ची के साथ छेड़छाड़ भी होती है तो भी ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए कानून में संशोधन करने की जरूरत हो तो वो भी किये जाये। ताकि हमारी बेटियां सुरक्षित माहौल में सांस ले सके। ऐसा होने पर ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की सार्थकता सिद्ध होगी अन्यथा वह एक सरकारी ढकोसला बनकर रह जाएगा।