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गरियाबंद विशेष लेख: घने जंगलों के बीच लिखी जा रही विकास की गाथा

Date : 01-Jul-18

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  • आदिवासी बाहुल्य ग्राम सुखरीडबरी अब सुखीडबरी बनने की ओर मनरेगा से तैयार हुआ विकास का समन्वित माॅडल
 
 जिला मुख्यालय से महज 35 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसा ग्राम पंचायत कोपेकसा का एक टोला सुखीडबरी इन दिनों विकास नई कहानी लिख रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना एवं वन, कृषि, मत्स्य, क्रेडा और अन्य विभागों के समन्वय से विकास का ऐसा माॅडल तैयार किया जा रहा है जो ग्रामीणों के जीवन में समृद्धि की उजियारा फैला देगा। दरअसल ग्राम पंचायत कोपेकेसा के एक टोला में भुंजिया समुदाय के 115 लोग निवास करते हैं, जिसे सुखरीडबरी के नाम से जाना जाता है। वे अपने परंपरागत जीवनशैली और सिमित संसाधनों को ही आधार मानकर अपनी जीवनचर्या चलाते है। इस टोला में प्राकृतिक संसाधन जल, जंगल और जमीन की पर्याप्त उपलब्धता ने विकास की मार्ग को प्रशस्त किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनीत नंदनवार ने जब क्षेत्र का दौरा किया तब पता चला कि संसाधन के बावजूद भी विकास यहां कोसो दूर है। ग्रामीणों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सहभागी नियोजन से गांव के विकास योजना बनाई गई, जिसे नाम दिया गया ‘‘हमर आजीविका हमर जंगल’’ अर्थात जंगल ही हमारी आजीविका है। कलेक्टर श्याम धावड़े के मार्गदर्शन में टीम द्वारा राजस्व, वन, कृषि, मत्स्य, पशुपालन विभाग तथा ग्राम के युवा, पंचायत पदाधिकारी के सक्रिय भागीदारी से विकास का नया माॅडल तैयार हुआ। विकास को आगे बढ़ाने के लिए सर्वप्रथम हितगाही मूलक एवं सामुदायिक विकास की कार्य योजना बनाई गई। यहां एक नया तालाब का उत्खनन किया गया , जिसमें पहाड़ी की ओर से आने वाले बरसात के पानी 1200 मीटर लम्बी नाली बनाकर तालाब की ओर प्रभावित किया गया है। जल संरक्षण और छोटी सिंचाई के लिए 10 व्यक्तिगत डबरी निर्माण किया गया है। एक कुंआ का निर्माण भी जारी है, जो पेयजल और सिंचाई के लिए भी उपयोग हो सकेगा। वन अधिकार पट्टा से प्राप्त 70 एकड़ भूमि के 30 वन अधिकार पट्टाधारकों के खेतों में भूमि सुधार और समतलीकरण का कार्य किया गया है। ये खेत अब फसल के लिए तैयार है, साथ ही इन खेतों में नर्सरी तैयार कर फलदार पौधे मुनगा, केला, आम, पपीता लगाने की तैयारी की जा रही है। खेतों के बीच सामुदायिक सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए 7 ट्यूबवेल स्वीकृत किया गया है। गांव के लोगों ने बताया कि एक समय यहां पर कोदो-कुटकी का उत्पादन संभव नहीं था। खेतों में 2.50 से 5 क्विंटल धान का प्रति एकड़ उपज होना मुश्किल था, जहां आज अच्छे उत्पादन की संभावना नजर आ रही है। पानी के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, लेकिन आज उद्यानिकी, कृषि उपज, मत्स्यपालन और पशुपालन के लिए सुखीडबरी तैयार हो रहा है। गांव आज मूलभूत सुविधा सड़क, बिजली, पेयजल के साथ ही विकास की नई गाथा लिखने तैयार हो रहा है। भूमि सुधार के हितग्राही बैसाखु राम और जगदीश ने उत्साह के साथ बताया कि ’’अब हमर गांव में खेती किसानी से अच्छा उत्पादन पाबो, हमर गांव अब सुखरीडबरी से सुखीडबरी हो जाही’’