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हँसता डॉलर, रोता रुपया-1

Date : 13-Sep-18

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गिरीश पंकज
डॉलर उछल-उछलकर चल रहा था और रुपया जर्जर बूढ़े की तरह बार-बार गिर रहा था। 
रुपये की हालत देखकर डॉलर हँसे जा रहा था - हा.. हा... हा। 
उसकी बमफाड़ हँसी सुनकर रुपया जल -भुनकर राख हो रहा था। उसने चिढ़ते हुए कहा, अरे, ज्यादा मत इतरा डॉलर ! कल तेरी कॉलर पकड़कर मैं तुझसे आगे हो जाऊंगा।  तब मैं भी ठहाके  लगाउँगा ।
डॉलर ने इस बार गगनफाड़ ठहाका लगाते हुए कहा, यह मुंह और दाल मसूर की ? तेराशा ही रहेगा ऐसा हाल। तेरा कभी भला नहीं हो सकता रे!  लगता है तू इस देश में गिरने के लिए ही पैदा हुआ है ।
रुपया होम्मात के साथ बोला, ऐसा नहीं है । जब मेरा देश आजाद हुआ था, तब तेरी और मेरी कीमत एक बराबर थी। अब वक्त की मार थी, या मेरी किस्मत, कुछ गिर गया. लेकिन जल्द ही संभाल जाऊँगा।
 डॉलर ने हँसते हुए पूछा, "अच्छा? पहले ठीक थे, तो अब क्या हो गया? अब तो तुम मुझ से सत्तर कदम पीछे हो 
 रुपया कराहते हुए बोला, ऐसा इसलिए है बंधु कि हमारे नेता भ्रष्ट हो गए हैं । उन्हें देश की कोई चिंता नहीं। ये सब अपने में मगन है, इस कारण मेरी इतनी बुरी हालत हो गई है। 
देश अच्छे से चलाते तो मेरी हालत भी अच्छी रहती । मैं भी शान के साथ तुझ से टक्कर ले रहा होता। लेकिन फिर भी मैं उम्मीद से हूँ  कि कल कोई अच्छा नेता आएगा, कोई ईमानदार सरकार आएगी तो मुझे भी पुनर्जीवन मिल जाएगा। देख लेना।
डॉलर रुपये की मासूमियत पर हँस पड़ा और बोला, "आजादी के सत्तर साल बीत चुके हैं । अब तक तेरा भला नहीं हुआ, तो भविष्य में क्या खाक होगा। पूत के पांव पालने में नजर आ जाते हैं । अगर तेरा भला होना होता, तो बहुत पहले हो जाता। लेकिन  तू तो लगातार गिर रहा है। और पता नहीं कितना गिरेगा.तेरी हालत क्या है  ..   जैसे... इस देश के लोगों का चरित्र गिर रहा है... 
जैसे ...लोगों की आंखों की शर्म मर रही है....
 जैसे ...इस देश में इंसानियत खत्म हो रही है ....
उसी तरह तू भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है । तेरा तो गॉड ही मालिक है। तेरा क्या होगा रे रुपइया?
रुपया ने संभलने ने की कोशिश की, मगर एक बार फिर नीचे गिर गया, तो बैठे-बैठे ही उसने कहा, ज्यादा मत इतरा डॉलर ! कल को तेरा भी पतन हो सकता है। सब दिन होत न एक समान। 
मुझे पूरी उम्मीद है कि एक- न - एक दिन मैं मजबूत हो जाऊंगा। देश की सरकार मुझे अच्छा खाना- पानी देगी तो मेरी सेहत सुधर जाएगी। इसलिए आज तू मेरा मजाक उड़ा ले लेकिन कल को मैं तेरा मजाक उड़ाउँगा। 
रुपये की बात सुनकर डॉलर फिर हँसा और बोला, तेरी सेहत ठीक होने के आसार तो नजर नहीं आते। देख न, कैसे महंगाई लगातार बढ़ रही है । पेट्रोल के भाव रोजाना बढ़ रहे हैं। 
आम आदमी हलाकान है। वह  रोज सरकार को कोसता है, बद्दुआएं देता है लेकिन सरकार है कि कान में रुई डालकर बैठी है । वह अपनी कमाई किए जा रही है । तो ऐसी सरकार से तू उम्मीद करता है कि यह तेरा भला करेगी? नेवर !! 
(शेष कल )