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संपादकीय : पेट्रोलियम पदार्थ के मूल्य में वृद्धि

Date : 10-Sep-18

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पेट्रोलियम पदार्थ के मूल्य में वृद्धि
पिछले एक पखवाड़े से पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार वृद्धि होती जा रही है। पेट्रोल तो अब राजधानी दिल्ली में 80 रूपए के पार हो गया है वहीं मुंबई में पेट्रोल 90 रूपए के पास पहुंच गया है। यदि पेट्रोलियम पदार्थों में वृद्धि का यह दौर इसी तरह चलता रहा तो बहुत जल्द पेट्रोल और डीजल शतक बना देगे। रसोई गैस के दामों में भी लगातार वृद्धि की जा रही है जिससे आम उपभोक्ताओं में सरकार के प्रति असंतोष गहराता जा रहा है। पेट्रोलियम पदार्थो के मूल्य में वृद्धि के खिलाफ ही अब कांगे्रस सहित सभी भाजपा विरोधी दलों ने 10 सिंतबर को भारत बंद का आव्हान किया है। जाहिर है विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखे वार करेगा। करना भी चाहिए पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्यों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। पहले ही महंगाई आसमान छू रही है और अब डीजल के दाम बढ़ जाने के कारण परिवहन सेवा और महंगी हो जाएगी। नतीजतन दैनिक आवश्यकता की चीजे आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगी। डीजल महंगा हो जाने का असर कृषि पर भी पड़ता है। पहले ही कृषि घाटे का सौदा है उपर से डीजल महंगा हो जाने से इसका कृषि व्यवसाय पर घातक असर पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि यदि वह पेट्रोल और डीजल को फिलहाल जीएसटी के दायरे में नहीं ला सकती है तो भी  इसके दाम कम करने के लिए वह वैट को घटाए कम से कम उन राज्यों में जहां भाजपा की सरकार है वहां पर वैट की दर कम करके लोगों को राहत दी जा सकती है किन्तु केन्द्र और राज्य सरकार के रूख को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि वे वैट की दर कम करने पर विचार करने को तैयार है। ऐसी स्थिति में निश्चित रूप से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और इसका खामियाजा चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को भुगतना पड़ेगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि केन्द्र सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के मूल्यों में हो रही वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए जल्द ही कारगर कदम उठाएगी और महंगाई से त्रस्त आम जनता को राहत पहुंचाएगी।