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संपादकीय: सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर फिर बवाल

Last Modified Aat : 30-Jun-18

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संपादकीय: सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर फिर बवाल

27 सितंबर 2016 को भारतीय सेना के पैरा कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर जो सर्जिकल स्ट्राइक की थी उसका विडियो जारी होने के बाद एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि ऊरी हमले के बाद भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों और लांचिंग पैड को नेश्तनाबूत कर दिया था। भारतीय सेना की इस कड़ी और बड़ी कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकवादी और पाकिस्तानी रेंजर भी मारे गए थे। सेना की इस सर्जिकल स्ट्राइक को पाकिस्तान नकारता रहा है। अब सर्जिकल स्ट्राइक का विडियो जारी होने पर पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा पड़ा है। किंतु पाकिस्तान से ज्यादा दर्द भारत के उन राजनीतिक दलों को हो रहा है जो सेना की सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जिकल स्ट्राइक बताते रहे है। वे सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते थे और आज जब सबूत के रूप में सर्जिकल स्ट्राइक का विडियो सामने आ गया है तो वे सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि चुनावी फायदा उठाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक का विडियो वायरल कराया गया है। जबकि अभी कहीं कोई चुनाव नहीं हो रहा है। जाहिर है सर्जिकल स्ट्राइक को सियासी रंग दिया जा रहा है जो कतई उचित नहीं है। सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रश्न चिन्ह लगाना या उसे लेकर विवादास्पद टीका-टिप्पणी करना देश के हित में नहीं है। इससे सेना का मनोबल भी गिरता है। राजनीति करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के पास मुद्दों की कोई कमी नहीं है। सेना को  लेकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। इस व्यर्थ के बवाल को खत्म कर सभी राजनीतिक दलों को सेना की कार्रवाई का समर्थना करना चाहिए ताकि पाकिस्तान के खिलाफ सेना अपनी लड़ाई लड़ सके।