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सावधान, आगे (सरकारी) पुल है!

Date : 07-Sep-18

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गिरीश पंकज
 सरकार ने यह निर्णय कर लिया है कि वह अपने हर नए-पुराने पुलों के पहले जनहित में एक बोर्ड लटकाएगी, लिखा होगा,  सावधान ! आगे पुल है। 
लोग कहते हैं कि उनकी सरकारें समझदार किस्म की होती है। सरकार करुणा से भरी होती है। उसके भीतर की दया-भावना अक्सर लपलपाती रहती है।  ... इसीलिए उसने जनहित में इतना सुंदर निर्णय किया। और ऐसा निर्णय होना भी चाहिए। जैसे मानव का जीवन अनिश्चितताओं से भरा होता है, ठीक उसी तरह से अपने देश में बने पुलों का जीवन भी बहुत ही अनिश्चित होता है।   वे   कब भसक जाएं,  धसक जाएं,  टूट जाए,  कहना मुश्किल है।  और ऐसा एक नहीं, अनेक बार हो चुका है।  पुल के नीचे से कोई गुजर रहा हो या पुल के ऊपर से कोई जा रहा हो तो पुल भरभराकर गिर जाता है और लोग अकाल मौत मर जाते हैं।  वैसे देखा जाए तो हमारे पुल  बेचारे मजबूत ही होते हैं  लेकिन  कभी-कभी  क्या करें, जब बाढ़ आती है तो पुल  के भीतर का जो प्रेमी-मन है न, वह तनिक विचलित हो जाता है। मदमाते  पानी को छूने के लिए,  उसके साथ गलबहियां करने के लिए बेताब होकर उसी में समा जाता है।  बाढ़ और उनका यह प्रेम हम बरसों से देख रहे हैं। इसमें सरकार भी क्या करें। क्या वह  दो प्रेमियों को आपस में मिलने से रोक दे ? यह तो बहुत बड़ा अन्याय होगा। इसलिए सरकार पुल की अनदेखी करती है।  और उसे बाढ़  के साथ प्रेम करने के लिए छोड़ देती है.शहरों में भी जो पुल बने होते हैं, उसकी  भी सरकार बहुत अधिक चिंता नहीं करती। एक पुल  जब  बनता है तो उसमें सैकड़ों मजदूरों को रोजगार मिलता ही है।  पुल बनाने वाले ठेकेदार और सरकार में बैठे बड़े-बड़े मठाधीशों को भी कमाई का अच्छा अवसर मिल जाता है। पुल  बनता है 100 करोड़ में और बनाने के धंधे में लगे लोगों की कमाई होती है 50 करोड़ की.  सब लोग मिल जुलकर कमीशन खाते हैं और ऐश करते हैं.  यह सब देख कर पुल जो है मन-ही-मन मेंकुढ़ता  रहता है।  वह बड़बड़ाता है कि मुझे क्या मिला ?बस आने-जाने वाले लोगों को झेलता  रहता हूं. पूरा शरीर पिराता रहता है।  एक दिन गुस्से में आकर पुल धड़ाम से नीचे गिर जाता है और जितने लोगों को मरना होता है, वे मर जाते हैं।  लेकिन सरकार की करुणा नहीं मरती।  वह जांच आयोग बिठा देती है कि पता करेंगे कि पुल के  गिरने के पीछे का रहस्य क्या है.  क्या वह भ्रष्टाचार के कारण गिरा ? क्या ओवरलोड के कारण गिरा ? क्या उसे पाकिस्तान की नजर लग गई, या उसे गिराने में किसी विदेशी ताकत का हाथ है ? सरकार जांच आयोग बिठाती है और पुल हादसे में जो लोग मर जाते हैं उनके परिजनों को कुछ  लाख का मुआवजा भी दे देती है।  मुआवजे  की घोषणा होती है लेकिन उस मुआवजे को प्राप्त करने के लिए लोगों का तेल निकल जाता है।  यह  अलग बात है कुछ पाने के लिए खोना पड़ता है। पुल-हादसे में जो व्यक्ति मारा, वह बेचारा असार -संसार से मुक्त हो गया, लेकिन घर वालों के लिए दो पैसों का इंतजाम कर गया।  किन्तु होता यह है कि घर वाले भी मुआवजे के चक्कर में मरणासन्न स्थिति में पहुंच जाते हैं। लेकिन इसमें सरकार की गलती नहीं है। सरकार तो देना चाहती है लेकिन बीच वाले भाई जी मारने की कोशिश करते हैं। उनको लगता है कि सामने वाले को पाँच  लाख का मुआवजा मिल रहा है तो हमें भी तो पाँच हजार मिल जाए. यह कमीशनखोरी भी कमाल की चीज़ है. जब तक कमीशन न दो, हमारे देश का कोई भी मिशन पूरा नहीं होता, तो बात हो रही थी पुल के पतन बनाम  गिरने की. 
जब सरकार ने देखा कि हमारे पुल कभी भी गिर सकते हैं और लोगों की जानें जा सकती हैं सरकार ने देख लिया कि हम  भ्रष्टाचार रोक नहीं सकते हैं, तो कम -से -कम लोगों की जानें रोकने का कोई ही उपाय किया जाए।  इसलिए उसने हर पुल के सामने चेतावनी वाला बोर्ड लगा दिया, 'Óसावधान आगे पुल  है 'Ó। यह  भी लिखवा दिया कि अपने जान-माल की सुरक्षा आप खुद करें।  पुल पर चढ़ते साथ तेजी के साथ पुल पार करने की कोशिश करें ताकि  आपकी जान सलामत रहे।  अगल-बगल की सड़क से यात्रा करें।  हो सकता है सड़कों पर गड्ढे हो, उस कारण आपको कभी कभार छोटे-मोटे धक्के झेलने पड़ सकते हैं , लेकिन आपकी जान तो नहीं जाएगी।  पुल पर चढऩे से हो सकता है, जब पुल गिरे  तो आप सीधे स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर जाएं।  इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए।  क्योंकि सावधानी हटी , दुर्घटना घटी. मानव जीवन बहुत ही नसीबो से मिलता है।  इसे किसी सरकारी पुल के कारण अ-समय नष्ट करना उचित नहीं कहा जा सकता।  और यह सुखद संयोग है  कि   सरकार ने 'सावधान, आगे पुल हैÓ वाला बोर्ड भी  लगा दिया है।  बोर्ड लगने का फायदा हुआ, अब दुर्घटनाएं भी कम होने लगी हैं।  पुल  पर से लोग कम ही गुजरते हैं। इस कारण पुल भी राहत की सांस ले रहे हैं।  अब उनके गिरने की घटनाएं नहीं के बराबर हो गई है।  लोग सरकार का धन्यवाद ज्ञापन कर रहे हैं कि कितनी अच्छी है हमारी सरकार, कितनी करुणा से भरी हुई है वह कि उसने हमें चेताया।  जैसे सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, उसी तरह अब यह बोर्ड भी नजऱ आने लगे हैं,  'सावधान, आगे सरकारी पुल है। इस पुल  से गुजरना आपके लिए हानिकारक हो सकता हैÓ।