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संपादकीय : सोशल मीडिया पर नोटा का प्रचार

Date : 07-Sep-18

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 संपादकीय : सोशल मीडिया पर नोटा का प्रचार 
जब से चुनाव आयोग ने ईवीएम में नोटा का प्रावधान किया है तब से लेकर आजतक यह पहला अवसर है जब सोशल मीडिया पर नोटा का जबरदस्त प्रचार हो रहा है। इसके पूर्व लोग नोटा के बारे में ठीक से जानते भी नहीं थे। चुनाव आयोग ने इनमें से कोई भी नहीं का विकल्प तो दे दिया था लेकिन सीमित संसाधनों के कारण चुनाव आयोग नोटा का वैसा प्रचार नहीं कर पाया था। जो अब तक हो जाना चाहिए था। यहीं वजह है कि बहुत कम संख्या में लोग नोटा का उपयोग कर पाते थे। जिन्हें कोई भी प्रत्याशी पंसद नहीं होता था वे वोट देने जाते ही नहीं थे। किन्तु इस बार सोशल मीडिया में नोटा छाया हुआ है। अगड़े और पिछड़े की लड़ाई में असरदार हथियार के रूप में सामने आ रहा है। खास तौर पर एसएसटी एक्ट के विरोधी नोटा का उपयोग करने की अपील कर रहे है। जिसका व्यापक असर पड़ता नजर आ रहा है इससे घबराए राजनीतिक दलों के लोग नोटा की आलोचना कर रहे है। नोटा को लेकर सोशल मीडिया पर एक जंग सी छिड़ गई है जिससे राजनीति दलों के होश उड़ गए है। नोटा आगामी लोकसभा चुनाव और चार राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने में कितनी असरदार भूमिका निभाएगा फिलहाल यह कह पाना तो मुश्किल है लेकिन नोटा को लेकर आम मतदाताओं में जो जागरूकता आ रही है उससे राजनीतिक दलों की जान सांसत में पड़ गई है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों से जुड़े लोग नोटा के खिलाफ अभियान चला रहे है और नोटा के उपयोग को अपने वोट का दुरूपयोग बता रहे है। जबकि नोट समर्थक ऐसे लोग जो राजनीतिक दलों के झूटे वादों और तुष्टिकरण नीति से त्रस्त हो चूंके है वो नोटा का जमकर समर्थन कर रहे हैं। यह प्रत्येक मतदाता का संवैधानिक अधिकार है कि चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी या पार्टियों को यदि वह ना पसंद करता है तो वह इनमें से कोई भी नहीं अर्थात नोटा का विकल्प चुन सकता है। बेहतर होगा कि नोटा के उपयोग का फैसला लोगों के स्वविवेक पर छोड़ दिया जाए।