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संपादकीय : कचरा प्रबंधन पर सुको सख्ती

Date : 04-Sep-18

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संपादकीय :  कचरा प्रबंधन पर सुको सख्ती
देश में कचरा प्रबंधन भगवान भरोसे है। कचरा प्रबंधन नियम 2016 को लागू करने में देश के अनेक राज्य कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। छत्तीसगढ़ सहित जिन गिने चुने राज्यों में कचरा प्रबंधन नियम लागू किया गया है। वहा भी इस नियम के पालन में कोताही बरती जा रही है। यही वजह है कि कचरा प्रबंधन नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुको ने महराष्ट्र और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में अब तक कचरा प्रबंधन को लेकर नीति नहीं बनाने से नाराज होकर आगामी आदेश तक देश भर में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। अब इस मामले की सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी तब देश भर में निर्माण कार्य ठप्प रहेंगे। इससे हॉउसिंग प्रोजेक्टों पर विपरित प्रभाव पड़ेगा। जिनके निर्माण कार्यों पर विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए तलख टिप्पणी की है कि राज्य नहीं चाहते है कि लोग गंदगी से निजात पाए। यह बेहद दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति है कि कुछ राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों ने कचरा प्रबंधन नियम 2016 के तहत अब तक कोई नीति नहीं बनाई है। दो वर्ष बीत जाने के बावजूद ये राज्य अपने नागरिकों के हितों का ध्यान नहीं रख रहे है। कचरा प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भड़कना स्वाभाविक है। एक ओर तो देश में जोर-शोर से राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सालिड वैस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रतिदिन हजारो टन सालिड वैस्ट निकलता है लेकिन उसके लिए कचरा प्रोंसेसिंग प्लांट तक नहीं बनाया गया है। यही वजह है कि कचरा प्रबंधन  एक जटिल समस्या के रूप में सामने आ रहा है। न सिर्फ सरकारी हॉउसिंग सोसायटियां बल्की निजी भवन निर्माता भी खुली अनदेखी करते है। सड़कों पर जहां तहां भवन निर्माण सामग्रियों के अवशेष पड़े देख जा सकते है। ऐसे लोगों के खिलाफ नगरीय निकायों को कार्यवाही करने तथा उनसे जुर्माना वसुने का अधिकार है लेकिन नगरीय निकाय  इसमें कोई रूचि नहीं लेते है। बहरहाल अब सुप्रीम कोर्ट ने कचरा प्रबंधन को लेकर जो कठोर रूख अख्तियार किया है। इससे यह उम्मीद की जा सकती है कि देश भर में सभी राज्य कचरा प्रबंधन नियम 2016 को लेकर कारगर कदम उठांगे।