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संपादकीय : महिलाओं की सुरक्षा का सवाल

Last Modified Aat : 29-Jun-18

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संपादकीय : महिलाओं की सुरक्षा का सवाल

भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे है। ग्लोबल एक्सपर्ट के एक सर्वे में महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देशों की सूची में भारत को पहला स्थान दिया गया है। थॉमसन रायटर्स फांउडेशन द्वारा कराए गए इस सर्वे के मुताबिक भारत में महिलाएं असुरक्षित है। सरकार ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिए और थॉमसन रायटर्स फांउडेशन को नोटिस जारी कर इस सर्वे में शामिल महिलाओं के नामों की सूची मांगी है। हो सकता है यह सर्वे अतिरंजित हो, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत में महिलाएं असुरक्षित है। आए दिन महिला उत्पीडऩ की घटना मीडिया की सुर्खियां बनता है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब महिलाए रैप का शिकार न होती हो या उनकी नृशंस हत्या न की जाती हो। घर और बाहर दोनों जगह ही महिलाएं असुरक्षा के माहौल में जी रही है। महिलाओं के हितों की रक्षा का दम भरने वाली सरकारे महिलाओं को उत्पीडऩ से बचाने के लिए कई कानून बना चुकी है। लेकिन इन कानूनों का कठोरता पूर्वक पालन नहीं हो पा रहा है। देश की राजधानी नई दिल्ली में पांच साल पूर्व हुए निर्भया कांड के बाद सरकार ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए कड़े कानूनी प्रावधान करने का दांवा किया था लेकिन इसके बाद भी महिलाओं के खिलाफ अपराध में लगातार इजाफा होते जा रहा है। निश्चित रूप से यह स्थिति चिंतनीय है और यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है। सरकार को चाहिए कि इस बारे में और ज्यादा कड़े कानूनी प्रावधान करें और उन्हें कड़ाई पूर्वक लागू कराए। तभी इस देश में महिलाएं स्वयं को सुरक्षित मानेगी।