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 रात को ढूँढता रहा

Date : 22-Aug-18

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प्रात: सूरज सुनहरे वस्त्रों में आकर दरवाज़े पर जब दस्तक दिया तो रात धीरे से सितारों को समेटने लगी और चाँद को भी तोड़कर अपने झोले में डाली अंधेरे की चटाई लपेटकर बगल में दबाई और दबे पाँव पीछे के दरवाज़े से नीचे की ओर खिसक ली । सूरज जश्न में डूबा रहा रात को ढूंढता रहा धीरे -धीरे शिखर चढ़कर पश्चिम की ओर चला जहाँ नीचे रात पहले से चाँद -तारों और अंधेरे को समेटे विराजमान थी सूरज ढलान पर नीचे ही रात से मिलने को आतुर पहुँचता है लेकिन रात से सूरज का मिलन नहीं हो पाता है। 

'ऐनुल बरौलवी