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 संपादकीय : खुलने लगी है महागठबंधन की गांठें

Date : 10-Aug-18

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2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए तमाम भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों का महागठबंधन बनाने की कवायद के बीच कथित गठबंधन की गांठे अभी से खुलने लगी है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में सामने आया। जहां एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश 125 वोट लेकर विजयी हुए वहीं कांगे्रस के प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद को 105 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। जबकि उन्हें कम से कम 111 सीटें मिलनी थी। जाहिर है कांगे्रस ने अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए भाजपा विरोधी दलों के साथ तालमेल नहीं बिठाया। आम आदमी पार्टी जिसने सरकार के खिलाफ संसद में पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष का समर्थन किया था उसने राज्यसभा में हुए उप सभापति के चुनाव से किनारा कर लिया। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि कांगे्रस ने उनसे समर्थन ही नहीं मांगा था। इसी तरह भाजपा के विरोध में मोर्चा खोलने वाली शिवसेना बीजद ने भी भाजपा प्रत्याशी का समर्थन कर दिया। कुल मिलाकर उपसभापति के चुनाव में कांगे्रस को मात खानी पड़ी और इससे यह बात भी साफ हो गई कि कांगे्रस भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने में सफल नहीं हो रही है। ऐसी स्थिति में कांगे्रस को 2019 में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने के प्रत्यास को गहरा झटका लगता नजर आ रहा है। गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश में भी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी कांगे्रस को गिनी-चुनी सीटें देने के लिए ही तैयार है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि कांगे्रस को यूपी में ज्यादा सीटों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच सीटों का बंटवारा हो जाने के बाद बची हुई सीटें  कांगे्रस को दी जाएगी। इससे स्पष्ट है कि उप्र में अपना जनाधार खो चुकी कांगे्रस पार्टी को सपा और बसपा कोई खास महत्व नहीं दे रहे है। इधर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कांगे्रस के साथ गठबंधन की इच्छुक नहीं है। ऐसी स्थिति में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनानेकी कांगे्रस की कवायद को कितनी सफलता मिल पाएगी यह कह पाना मुहाल है।