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राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों की ऐसी हालत मजदूरी करने गए दूसरे राज्य में जब पैसा मांगे तब पता चला की हम तो बंधक मजदूर, 26 को बचाया

Date : 28-Jun-18

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कवर्धा (नवप्रदेश)। कबीरधाम जिलें के भोले-भाले बैगा आदिवासियों को अपने झांसे में लेकर दो लोगों ने आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले के मैंगो पल्प व जूस कंपनी पल्प एण्ड साइंस लिमिटेड में मजदूरी का काम दिलाने ले गए थे और इन्हें यह भी कहा गया था कि हर महीने लगभग 9 हजार रूपये मजदूरी राशि मिलेगी लेकिन इन्हें क्या पता कि उन्हें ठेकेदार के द्वारा मजदूरी राशि का भुगतान न करते हुए बंधक बनाकर वहीं रखा जाएगा। और मजदूरी राशि की मांग करने पर ठेकेदार उन्हें सप्ताह में मात्र 200 रूपये दिया करता था। ग्राम अमनिया की महिला की किस्मत इतनी अच्छी रही कि उसे आंध्र से भागने मे सफलता मिली और उसी के कारण बाकि 25 अन्य मजदूरों को भी मुक्ति मिली और आज वे कवर्धा पहुंच चुके है। अगर कहीं सघन बाई नहीं भाग पाती तो शायद ये मजदूर आज भी शोषण झेलते हुए ठेकेदार के द्वारा रोकी गई राशि को लेने बंधक की तरह रूके रह जाते। एक ओर जहां लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने मनरेगा, महिला स्व सहायता समूह, कौशल उन्नयन सहित कई योजनाएं संचालित है बावजूद इसके बैगा आदिवासियों को रोजगार के लिए छत्तीसगढ़ से बाहर जाना पड रहा है। क्या इन योजनाओं का संचालन जिले में सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। वहीं अब रेस्क्यू टीम ने मजदूर बैगा आदिवासियों को छुडवाकर बुधवार 27 जून को कवर्धा लौट गई है ऐसी जानकारी पुलिस विभाग से मिली है।
बैगा आदिवासियों को बैंगलोर की एक कंपनी में अच्छी तनख्वा दिलाने का झांसा देकर इन 26 लोगों को ले गए। जहां उन्हें मजदूरी राशि का भुगतान न करते हुए बंधक की तरह ही रखा जा रहा था। अगर कहीं इन मजदूरों का भुगतान प्रतिमाह कर दिया जाता तो वे बरसात के चलते अपने खेतों मे काम करने लौट आते। इन मजदूरों में सुखीराम, मनोहर सिंह, दसरू, कुमार सिंह, जगतराम, हजारीप्रसाद, लक्ष्मण, कुंवर सिंह, बडई, मोतीलाल, सनमतिया, जागिनबाई, सीता, सुनीता, रूपौतीन, छिंदियाबाई, सघनबाई, बजरीबाई, चैतीबाई, भदलीबाई, कुम्हारिन बाई, जामबाई, राजबाई, जामिनबाई, सोनिया, सनिआरों बाई, तुलसीबाई, टिकलोबाई के साथ अन्य 6 बच्चें जिनमें झमलू, झिमली, मुकेश्वरी, परमिला, उरमिला व रमिला थी। जिसे रेस्क्यू टीम ने ठेकेदार के चंगुल से आजाद कराया। ज्ञात हो कि आध्रं से भागकर आई ग्राम अमनिया की महिला सघन बाई ने इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी जिलाधीश व पुलिस अधीक्षक को दी। जिसके बाद शुक्रवार 22 जून को जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम कवर्धा से लगभग शाम 4:30 बजे नागपुर के लिये निकले। इनके साथ में सघन बाई व उसका बेटा मोतीलाल भी था। वहीं इनको छुडाने पूरा दिन सफर के दौरान योजना बनाई गई कि आखिर रेस्क्यू कैसे किया जायेगा। क्योंकि उक्त फैक्ट्री का पता जानने के साथ ही मजदूरो को सुरक्षित वापस लाना था। टीम लगभग रात्रि 8 बजे तमिलनाडु के बैंगलोर जिले के काटपाडी पहुंची। रविवार सुबह 6:30 बजे से ही टीम अपने मिशन पर लग गई। टीम को दो भागों मे बांट दिया गया। एक टीम में श्रम उपनिरीक्षक समेत 3 लोग थे, जिनमें महिला सघन बाई भी थी। टीम जूस फैक्ट्री पहुंची और जांच शुरू कर दी। 25 जून को टीम को दो सदस्य आंध्र के चित्तूर जिला मुख्यालय पहुंची। एसडीएम व अन्य अधिकारी से टीम की बैठक हुई और उन्हें पूरी जानकारी दी गई। दूसरी टीम फैक्ट्री कंपाउण्ड में बने श्रमिकों के रहवासी क्षेत्र में कबीरधाम जिले के बैगा मजदूरों की पहचान करती रही। बैगा मजदूर मंगरवार को कबीरधाम उपनिरीक्षक के सामने एसडीएम के आदेष के बाद जूस कंपनी ने सभी बैगा मजदूरों को सुबह 7 बजे ही राशि का भुगतान किया। कुल 26 श्रमिकों को लगभग 5 लाख 64 हजार रूपये की मजदूरी राशि दी गई।

मजदूरों को जिस राज्य में बंधक बनाया जाता है वहां से बंधको को छुड़वाये जाने के बाद राज्य द्वारा जांचकर सर्टिफिकेट दिया जाता है जिसके बाद मजदूरो को श्रम अधिनियम के तहत लगभग 2 लाख की राषि जारी की जाती है।
राजेश आदिले, श्रम अधिकारी कवर्धा जिला कबीरधाम
कवर्धा से मजदूरो को लाने टीम रवाना की गई थी। वे सभी को सुरक्षित लेकर कवर्धा के लिए निकल चुके है और बहोत जल्द उन्हें उनके ग्राम पहुंचा दिया जायेगा।
डॉ. लाल उमेंद सिंह, पुलिस अधीक्षक कवर्धा
बेहतर रोजगार के लिए लोग अन्य जिले चले जाते है। अगर कहीं पलायन की स्थिति बनती है तो ग्राम पंचायत के माध्यम से इसकी जानकारी दी जायेगी। ग्राम पंचायत में संचालित पलायन पंजी के संधारण में दर्ज किया जायेगा। वहीं मजदूरों की योग्यता अनुसार उन्हें कार्य प्रदान कराया जायेगा तथा जो बच्चे है उन्हें स्कूल में दाखिला कराया जायेगा।
अवनीश शरण, कलेक्टर कवर्धा