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संपादकीय : कश्मीर पर विवादित बयानबाजी

Last Modified Aat : 27-Jun-18

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संपादकीय : कश्मीर पर विवादित बयानबाजी

जम्मू कश्मीर में पीडीपी और भाजपा की सरकार के हटने और वहां राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद से सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ आपरेशन ऑल आउट को गति दी है जिसका स्वागत करने की जगह कांगे्रस पार्टी के कुछ नेता विरोध कर रहे है जो कतई उचित नहीं है। कश्मीर और सेना की कार्रवाई को लेकर कांगे्रस के नेता एक के बाद एक विवादास्पद बयानबाजी कर रहे है। उनकी बयानों का पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैय्यबा स्वागत कर रहा है। समझ में नहीं आता कि सेना का मनोबल गिराने और आतंकवादियों को प्रोत्साहित करने वाली बयानबाजी कर कांगे्रस के ये नेता आखिर क्या साबित करना चाहते है? पहले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांगे्रस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया उसके बाद कांगे्रस विधायक सैफुद्दीन सोज ने कश्मीर की आजादी को लेकर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बयान को समर्थन कर दिया। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदम्बरम ने कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ की जा रही सेना की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगा दिया है। उन्होंने सेना अध्यक्ष विपिन रावत के बयान की निंदा करते हुए उसे राजनीति प्रेरित करार दिया है। गौरतलब है कि सेनाध्यक्ष विपिन रावत ने यह कहा था कि कश्मीर को आजादी कभी नहीं मिलेगी और जो आतंकवादी व अलगाववादी इस तरह की मांग उठा रहे है उनके साथ सेना सख्ती से निपटेगी। सेना अध्यक्ष के इस बयान से पी चिदम्बरम क्यों तिलमिला गये है यह बात समझ से परे है। कांगे्रस नेता कपिल सिब्बल ने भी इसी तरह का विवादास्पद बयान दिया है और यह आरोप लगाया है कि भाजपा कश्मीर से धारा 370 हटाने की तैयारी कर रही है। यदि ऐसा है भी तो इससे कपिल सिब्बल को क्या दिक्कत है। आज सारा देश चाहता है कि कश्मीर से धारा 370 हटाई जाये और उसे मिला विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया जाये। जब तक ऐसा नहीं होगा कश्मीर में शांति स्थापित नहीं होगी। बेहतर होगा कि कांगे्रस के नेता कश्मीर और सेना को लेकर विवादित बोल बोलने से परहेज करे।