nav Pradesh logo

 गुणवत्ता को ताक में रखकर 40 लाख का बनवाया बाउंड्रीवाल, 3 माह में ही पड़ी दरार

Date : 06-Aug-18

News image
News image
News image
News image
News image
<

जैजैपुर ब्लॉक के किकिरदा पंचायत का मामला

जांजगीर-चांपा (नवप्रदेश)।  जिले के जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत किकिरदा में शासन के द्वारा विभिन्न योजनाओं के लिए प्रदत्त राशि में कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रही है। विकास के नाम पर बहुत सारे कार्य इस ग्राम पंचायत के लिए स्वीकृत हो रहे हैं और प्राप्त कार्यों में कहीं पर भी गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य नही कराया जा रहा है। गुणवत्ता के नाम पर खानापूर्ति कर कमीशनखोरी का खेल बदस्तूर जारी है। कुछ दिन पूर्व ही इस पंचायत के सचिव सीताराम कर्ष  पर पात्र हितग्राही के लिए आवंटित प्रधानमंत्री आवास को अपात्र व्यक्ति को देने का आरोप लगा था, जिसकी शिकायत पर कलेक्टर जांजगीर चांपा द्वारा रिकवरी का आदेश जारी किया गया था। वर्तमान में 20 लाख लागत की बाउंड्रीवाल की एक यूनिट शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला किकिरदा एवं 20 लाख लागत की एक यूनिट शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय  किकिरदा में बाउंड्रीवाल का निर्माण किया गया है। इसमे भी राशि का जमकर बंदरबांट किया गया और घटिया निर्माण कार्य करा कर औपचारिकता पूरी की गई। लाजमी है कि 3 माह हुए इस बाउंड्रीवाल में दरारें पड़ चुकी है। इससे बाउंड्रीवॉल को किस गुणवत्ता के साथ निर्माण कराया गया इसका बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है। साथ ही साथ सचिव एवं सरपंच की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विदित हो कि 20 -20 लाख की दो यूनिट कुल मिलाकर 40 लाख की लागत पर बने बाउंड्री वाल का कार्य निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत किकिरदा का सरपंच ही था। अन्य कार्यों की भांति बाउंड्री वाल का कार्य भी कमीशनखोरी का भेंट चढ़ चुका है । फिलहाल कारण चाहे जो भी हो यह ग्राम पंचायत किकिरदा काफी दिनों से विवाद में है, तथा इस ग्राम पंचायत किकिरदा के सचिव सीताराम कर्ष एवं सरपंच चंद्रशेखर क्षत्रिय के कार्यशैली पर हमेशा उंगली उठती रही है । किंतु  बड़े बड़े काम को गलत तरीके से करने के बावजूद भी आज तक इन पर किसी प्रकार का शिकंजा नहीं कसा जाना  समझ से परे है । बहरहाल  बाउंड्रीवॉल  की गुणवत्ता जांच का विषय हो सकता है । किंतु सारा दारोमदार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व जिला प्रशासन के ऊपर निर्भर करता है। ऐसे में ग्रामीण उचित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

गांव से सरपंच की दूरी 40 - 50 किलोमीटर

ग्राम पंचायत किकिरदा के सरपंच चंद्रशेखर छतरी गांव से 40 50 किलोमीटर की दूरी जांजगीर-चांपा में किराए के भवन में निवास करते हैं ग्राम विकास की बातें तो दूर गांव गली की कीचड़ की समस्या हो चाहे बिजली पानी की समस्या हो उसको ग्रामीणों की दुख दर्द से किसी प्रकार का लेना देना नहीं है सरपंच सिर्फ जांजगीर-चांपा में ही निवास करना पसंद करते हैं जब से चुनाव जीते हैं तब से लेकर आज तक लगभग 3 वर्ष से ज्यादा हो गया सरपंच गांव में नहीं रहते हैं जांजगीर चांपा से विकासखंड मुख्यालय जैजैपुर आना जाना करते हैं । और यहां के ग्रामीण सरपंच के ना रहने से भारी परेशान नजर आ रहे हैं यहां तक की आय जाति निवास के लिए पढ़ाई करने वाले बच्चों को भटकना पड़ रहा है यहां से चांपा जाना पड़ रहा है जबकि सरपंच को ग्राम पंचायत में रहना चाहिए पर सरपंच जिला मुख्यालय में निवास कर रहा है गांव की समस्या से उसको कोई सरोकार नहीं है।

 लिखित शिकायत के बाद भी कार्रवाई शून्य

ग्राम पंचायत किकिरदा  के उपसरपंच गुड्डूकुहारएवं राम कुमार देवांगन सहित ग्रामीणों ने जिसकी शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत जैजैपुर से लिखित में किया है। उसके बाद भी कार्यवाही नहीं होना समझ से परे हैं। इस संबंध में ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार  जनपद पंचायत जैजैपुर सीईओ के अलावा जिला पंचायत जांजगीर के सीईओ अजित बसंत के कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है । यदि बाउंड्रीवॉल की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए तो गुणवत्ता उजागर हो सकती है।