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अमृत योजना के लिए 170 करोड़ के बॉण्ड जारी करेगा इंदौर नगर निगम

Last Modified Aat : 27-Jun-18

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  • बॉण्ड जारी करने वाला देश का तीसरा और प्रदेश का पहला नगर निगम  

भोपाल । शहर की विकास गतिविधियों में नागरिकों की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इंदौर नगर निगम 28 जून, 2018 को 170 करोड़ रूपये के बॉण्ड जारी करने जा रहा है। इन बॉण्ड का पब्लिक इश्यू नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 28 जून को प्रात: 11 बजे से दोपहर एक बजे तक उपलब्ध रहेगा। इंदौर नगर निगम को डबल 'ए' रेटिंग प्रदान की गई है। इस तरह के बॉण्ड जारी करने वाला इंदौर देश का तीसरा और प्रदेश का पहला नगर निगम होगा। आयुक्त नगर निगम ने बताया है कि इन्दौर की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, अधोसंरचना विकास और व्यावसायिक परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए इसमें बड़ी मात्रा में निवेश की संभावना है। उन्होंने बताया कि इससे प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग अटल मिशन फॉर रिज्यूवेनेशन एण्ड अर्बन ट्रान्सफार्मेशन (अमृत) के लिए किया जायेगा।

जानकारी में बताया गया कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत योजना के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में वाटर सप्लाई, सीवरेज, स्टार्म वाटर ड्रेनेज, अर्बन ट्रान्सपोर्ट और ग्रीन स्पेस विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इंदौर नगर निगम द्वारा 972.26 करोड़ रूपये की राशि अमृत योजना में खर्च की जानी है, जिसमें से 324.05 करोड़ रूपये भारत सरकार द्वारा तथा 486.13 करोड़ रूपये राज्य सरकार द्वारा और 162.08 करोड़ रूपये नगर निगम का अंशदान निर्धारित किया गया है। नगर निगम द्वारा इस 160 करोड़ रूपये में जन-भागीदारी दर्ज कराने के लिए पब्लिक बॉण्ड जारी किए जा रहे हैं।

बॉण्ड से प्राप्त राशि में 629.20 करोड़ रूपये इंदौर शहर की पेयजल व्यवस्था पर, 268.06 करोड़ रूपये सीवरेज सिस्टम डेव्लपमेंट, 10 करोड़ रूपये बाढ़ के पानी की निकासी, 40 करोड़ रूपये अर्बन ट्रांसपोर्ट तथा 25 करोड़ रूपये ग्रीन बेल्ट क्षेत्र विकसित करने पर खर्च किया जाएगा। बताया गया कि बॉण्ड की अवधि 10 वर्ष होगी, जिस पर प्रति छमाही ब्याज दिया जायेगा, 7 वर्ष बाद निवेशक बॉण्ड की प्रति वर्ष 25 प्रतिशत राशि मुक्त करा सकेगा।

भारत सरकार की मंशानुरूप अमृत योजना के लिए बॉण्ड इंदौर नगर निगम से पूर्व पूना और हैदराबाद नगर निगम द्वारा जारी किए जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रदेश के 34 शहरों का चयन किया गया है। इस योजना में भारत सरकार शहरी विकास मंत्रालय द्वारा प्रदेश को पाँच वर्षों में 6200 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।