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 नशा मुक्ति के लिए सामाजिक जागरुकता बढ़ाने की जरुरत

Date : 26-Jun-18

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नई दिल्ली । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि नशीले पदार्थों और शराब के व्यसन की समस्या न केवल व्यक्ति, परिवार, और समाज को प्रभावित करती है बल्कि यह स्वास्थ्य, संस्कृति, विकास और राजनीति सहित अनेक क्षेत्रों पर असर डालती है। श्री कोविन्द ने मद्यपान और मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने के बाद यहां आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह समस्या गरीबी को तो बढ़ाती ही है साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, मानवीय संसाधनों और लोक-कल्याण के लिए एक चुनौती है। संविधान के अनुच्छेद 47 में भी प्रावधान किया गया है कि 'राज्य मादक पेयों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक औषधियों के उपभोग का निषेध करने का प्रयास करेगा।Ó 

उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए कई कानून हैं लेकिन प्रभावी समाधान के लिए समाज और समुदायों की सक्रिय भागीदारी होना आवश्यक है। समाज की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने में आज के इन राष्ट्रीय पुरस्कारों की विशेष भूमिका है। अवैध मादक पदार्थों के दुरुपयोग से लोगों के स्वास्थ्य के लिए भारी चुनौतियां पैदा हो रही हैं। खासकर युवा पीढ़ी और स्कूल में पढऩे वाले बच्चों पर इस खतरे का अधिक बुरा असर पड़ता है। अक्सर युवाओं तथा बच्चों द्वारा साथियों के दबाव में अवैध मादक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे युवाओं में इन पदार्थों से होने वाली हानि के बारे में जागरूकता भी नहीं होती है। 

राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक वातावरण में हो रहे निरंतर बदलाव तथा हर क्षेत्र में बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा के कारण, युवा-वर्ग में मनोरोगियों की संख्या भी बढ़ी है और मादक पदार्थों तथा मद्यपान का प्रचलन भी। इसीलिए इस समस्या के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समाधान उतने ही ज़रूरी हैं जितने कानून और चिकित्सा के द्वारा किए जाने वाले उपाय। नशाग्रस्त युवाओं की प्रभावी नशामुक्ति के लिए उन्हे रोजगार उपलब्ध कराकर समाज के साथ जोडऩे की जरूरत है।

श्री कोविंद ने कहा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या को जागरूकता, रोकथाम की जानकारी, प्रोत्साहन, तथा समर्थन के प्रयासों से हल किया जा सकता है। इन प्रयासों में नशा-प्रभावित लोगों के प्रति करुणा और सहानुभूति भी आवश्यक है। माता-पिता, शिक्षकों, चिकित्सकों, स्थानीय और स्वैच्छिक संस्थाओं के लोगों को प्रशिक्षण देकर चिकित्सा और पुनर्वास को बड़े पैमाने पर शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि सरकार 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंसÓ के माध्यम से इस संबंध में शिक्षण संस्थानों में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रही है। इन प्रयासों में एनएसएस और स्पिक-मैके जैसी संस्थाओं का सहयोग लिया गया है। रेडियो पर एक शिक्षाप्रद और प्रेरक कार्यक्रम प्रसारित हो रहा है। लगभग चार सौ नशा-मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं । उन्होंने इन सभी प्रयासों के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सराहना की और कहा कि इन प्रयासों को और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की ज़रूरत है।

श्री कोविंद ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या के प्रामाणिक आकलन के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे प्राप्त होने वाले परिणामों से हमारे राष्ट्रीय प्रयासों को और अधिक स्पष्ट रुप से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ पैदा करने वाले म्यांमार-लाओस-थाईलैंड के 'गोल्डन ट्राएंगलÓ और ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान के 'गोल्डन क्रेसेंटÓ कहे जाने वाले क्षेत्रों के बीच भारत की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति के कारण हमारे लिए यह समस्या और भी जटिल हो जाती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी के कारण इनके दुरुपयोग में बढ़ोतरी के साथ-साथ आतंकवाद और राजनीतिक अशांति की समस्याएँ भी जुड़ जाती हैं। इसीलिए पंजाब और मणिपुर जैसे सीमावर्ती राज्यों में और भी अधिक सतर्कता और निरंतर प्रयासरत रहने की आवश्यकता है।