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मुखड़ा क्या देखे दर्पण में

हँसता डॉलर, रोता रुपया-1

हँसता डॉलर, रोता रुपया-1

गिरीश पंकजडॉलर उछल-उछलकर चल रहा था और रुपया जर्जर बूढ़े की तरह बार-बार गिर रहा था। रुपये की हालत देखकर डॉलर हँसे जा रहा था - हा.. हा... हा। उसकी बमफाड़ हँसी सुनकर रुपया जल -भुनकर राख हो रहा था। उसने चिढ़ते हुए कहा, अरे, ज्यादा मत इतरा डॉलर ! कल तेरी...

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भ्रष्टाचार पर घमंड-1

भ्रष्टाचार पर घमंड-1

गिरीश पंकज ( कल का शेष ) मैंने मुसकराते हुए कहा, अगर भ्रष्टाचार करने के लिए कोई पद्मश्री होती तो वह सबसे पहले आपको मिल जाती! मेरी इस बात पर वह भी मुस्करा कर बोले,  अरे यह आपको कैसे पता चला कि मैं इन दिनों पद्मश्री के लिए जुगाड़ जमा रहा हूं? मैंने चौंकते...

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 भ्रष्टाचार पर घमंड-1

भ्रष्टाचार पर घमंड-1

गिरीश पंकज उनको अपने भ्रष्ट होने पर बड़ा घमंड है ।  उस दिन वह अपनी मित्रमंडली में सबको बड़े शान से बता रहे थे कि मैंने कैसे-कैसे और कितने कितने छोटे- बड़े घोटाले किए। मजे की बात यह है कि  लज्जा का कोई भाव नही, उल्टे गर्व का भाव था भाई। ...

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परउपदेश कुशल बहुतेरे -2

परउपदेश कुशल बहुतेरे -2

 मित्र ने मुँह बिचकाते हुए कहा, नहीं, मैं इस बात को नहीं मानता।मैंने कहा, इसी चक्कर में तो अपना भारत कभी-कभी दु:खी हो जाता है। वो क्या कहते हैं कि यहीं मार खा जाता है अपना इंडिया। तो आप जैसी सोच से भरे होने के कारण ही तो उस गांव...

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सावधान, आगे (सरकारी) पुल है!

सावधान, आगे (सरकारी) पुल है!

गिरीश पंकज सरकार ने यह निर्णय कर लिया है कि वह अपने हर नए-पुराने पुलों के पहले जनहित में एक बोर्ड लटकाएगी, लिखा होगा,  सावधान ! आगे पुल है। लोग कहते हैं कि उनकी सरकारें समझदार किस्म की होती है। सरकार करुणा से भरी होती है। उसके भीतर की दया-भावना अक्सर लपलपाती...

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 शिक्षक दिवस पर उदास मास्टर जी

शिक्षक दिवस पर उदास मास्टर जी

 गिरीश पंकज शिक्षक दिवस के दिन मास्टर रामलाल जी मुंह लटका कर बैठे थे. इस बार भी उनका सम्मान नहीं हुआ।  वह दुखी थे।  हमने समझाया, ' गुरु जी, आजकल शिक्षक सम्मान के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं आप जुगाड़-कला में पारंगत नहीं है इसलिए उसके बारे में कुछ सोचना...

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 स्टार्टअप हिंदी! स्टैंडअप हिंदी-1

स्टार्टअप हिंदी! स्टैंडअप हिंदी-1

गिरीश पंकजसाथियो, आज हिंदी डे है। हम सब लोग इसे सेलिब्रेट करने यहाँ जमा हुए हैं। हिंदी हमारी नेशनल लेंगुएज़  है।  इसका फ्यूचर तभी होगा ब्राइट होगा, जब हम सब लोग करेंगे  इसके लिए फाइट ।  आय एम् रांग आर राइट?और हां,  हिंदी के डेवलपमेंट के लिए टाइम टू टाइम काम्पीटीशन वगैरह...

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प्याज नहीं, ब्याज खाने का रहस्य क्या है-1

प्याज नहीं, ब्याज खाने का रहस्य क्या है-1

गिरीश पंकज हमारे एक मित्र बड़े ज्ञानी हैं । उन्होंने पिछले दिनों जबरदस्त बात बताई कि समाज में कुछ लोग प्याज क्यों नहीं खाते और ब्याज क्यों खाते हैं । मैंने कारण जानना चाहा  तो उन्होंने बताया, सदियों पुरानी बात है। एक नागा बाबा थे।  उन्होंने दुनियादारी को छोड़कर वैराग्य का...

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 निकल पड़ी लाटरी !!

निकल पड़ी लाटरी !!

गिरीश पंकजएक पार्टी के बहुत बड़े नेता का निधन हो गया। यह वह दौर था, जब पार्टी संकट में थी । उसकी लोकप्रियता घट रही थी। उस का जनाधार भारतीय रुपये (बनाम दुबके पतले व्यक्ति की चड्डी की तरह भी ) तेजी के साथ खिसक रहा था, बोले तो गिर...

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मॉरीशस भी 'इंडिया  बन रहा-3

मॉरीशस भी 'इंडिया बन रहा-3

गिरीश पंकज(कल का शेष )  मारीशस के गंगा तलाव जाने के बाद सर्वाधिक संतोष होता है। वहां के मंदिरों को देख कर सर श्रद्धा से झुक जाता है। कितनी सुंदर सुंदर देव प्रतिमाएँ स्थापित हैं वहां।  अभी कुछ वर्ष पहले ही उस  परिसर में मां दुर्गा और भगवान शंकर की लगभग...

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 ब्राह्मण साहित्यकार से मुठभेड़

ब्राह्मण साहित्यकार से मुठभेड़

  मेरे मित्र लिखने में भिड़े हुए थे। मैंने पूछा-  क्या लिख रहे हो ? ब्राह्मण साहित्य। वे बोले। ब्राह्मण साहित्य? ये क्या बला है भई ? मैंने कहा- साहित्य तो साहित्य होता है। ये आपने साहित्य को जातियों में बाँटना कब से शुरू कर दिया ? साहित्य तो साहित्य...

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अंगरेजों (की औलादो) भारत छोड़ो!

अंगरेजों (की औलादो) भारत छोड़ो!

गिरीश पंकज अंगर भारत छोड़ो आंदोलन होता रहा और एक दिन आखिरकार भाग गए साले..यानी अंगरेजों लेकिन अपनी औलादें छोड़ गए। अब हम चीख रहे हैं, गला फाड़-फाड़ कर चीख रहे हैं- 'अंगरेजों की औलादों भारत छोड़ो लेकिन ये हैं कि जाने का नाम ही नहीं ले लेते। मैं नारे...

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 वह लोककला मर्मज्ञ!

वह लोककला मर्मज्ञ!

  गिरीश पंकज पहले मैं उनको एक व्यापारी के रूप में पहचानता था।  उनकी मिलावटी संस्कृति का मैं शुरू से कायल था।  वह किस ची में क्या मिला दे, भगवान् भी न जान पाए। वह सारा खेल इतनी सफाई से करते रहे हैं कि अच्छे-अच्छे खाँ भी उन्हें पकड़ नहीं...

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विदेश न जा पाने का दुख

विदेश न जा पाने का दुख

गिरीश पंकज अपुन के प्रजातंत्र के माई-बापों को बड़ी तकलीफ हो जाती है।  कभी गरमी में, कभी बरसात में।  बेचारे देश-सेवा करते-करते मौसम की मार झेलते रहते हैं। बारिश के दिनों में बाढग़्रस्त इलाकों का हवाई निरीक्षण करते हैं। कितनी तकलीफ होती है। सोचो, आकाश से नीचे निहार रहे हैं...

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 झंडा फहराने वाले का सच... 

झंडा फहराने वाले का सच... 

  गिरीश पंकज (कल का शेष) - अच्छा, तो ऐसा है क्या, मैं तो आज तक दोनों को एक ही समझता रहा। आपने मुझे बता दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।  वह बोले- तो आप खादी के कपड़े पहनकर ही जाते होंगे ? मैंने पूछताछ का क्रम जारी रखा।...

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 झंडा फहराने वाले का सच... 

झंडा फहराने वाले का सच... 

  गिरीश पंकज (कल का शेष) - अच्छा, तो ऐसा है क्या, मैं तो आज तक दोनों को एक ही समझता रहा। आपने मुझे बता दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।  वह बोले- तो आप खादी के कपड़े पहनकर ही जाते होंगे ? मैंने पूछताछ का क्रम जारी रखा।...

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अफसर चले विदेश, धर हिंदी-प्रेमी का वेश-2 

अफसर चले विदेश, धर हिंदी-प्रेमी का वेश-2 

गिरीश पंकज (कल का शेष ) मैंने अफसर से पूछा, मतलब आप तीन दिन पूरे सम्मेलन में बैठकर हिंदी के बारे में जो बातें हो रही हैं, उसको ध्यान से सुनेंगे और यहां आकर रिपोर्ट देंगेकि वहां क्या-क्या हुआ ? मेरी बात सुनकर अफसर फिर हँस पड़ा और बोला, मॉरीशस...

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अफसर चले विदेश, धर हिंदी- प्रेमी का वेश-1 

अफसर चले विदेश, धर हिंदी- प्रेमी का वेश-1 

गिरीश पंकज जो जीवन भर अंगरेजी में गोठियाते रहे अब खिलखिला रहे है। सरकारी खर्चे पर  विश्व हिंदी सम्मेलन में  जा रहे है। जी हाँ, वे सब-के-सब अँगरेज़ी की गोद में पलने वाले अफसर थे, मगर प्रहसन यह कि  विश्व हिंदी सम्मेलन में जा रहे थे । सब ' झन  सरकारी थे और सरकार के...

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 और अब बच्चा उत्सव 2 

 और अब बच्चा उत्सव 2 

गिरीश पंकज विपक्ष की बोलती बंद हो जाती। सरकार फिर किसी घोषणा पर ध्यान केंद्रित करती और जनता सरकार के निर्णय पर तालियां पीटने लगती। सरकार ने जनता को सम्मोहित कर दिया थाण् ज्यादातर मतदाता गरीब थे और गरीबों के लिए खाने.पीने का सामान एकदम सस्ता हो गया थाण् कोई...

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आईसीयू की मछलियाँ 

आईसीयू की मछलियाँ 

गिरीश पंकज समय कितना बदल गया है, बाप रे!! एक दौर था,  जब अस्पतालों के आईसीयू में गंभीर मरीज ही प्रवेश पाते थे लेकिन अब तो छोटी छोटी मछलियों को भी यह सौभाग्य मिलने लगा है । पिछले दिनों एक सरकारी अस्पताल के आई सी यू का दृश्य देखकर मुझे...

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हम सबका 'व्हाट्सऐपीकरण -2

हम सबका 'व्हाट्सऐपीकरण -2

  गिरीश पंकज (कल का शेष) जमाना  'ई-मेल का है। क्या  'मेल और क्या  'फी-मेल, हर कोई इसी से खेल रहा है।  हर तरफ तो  'ई  ही 'ई है।  'ई-बैंकिंग,  'ई-मार्केटिंग, 'ई-गवर्नेंस, 'ई-लूट, 'ई-ठगी, 'ई- लव, 'ई-रोमांस आदि-आदि।  कुछ लोग पूछते हैं  'ई का है? हम कहते हैं-  'ई ऊ...

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हम सबका 'व्हाट्सऐपीकरण-1

हम सबका 'व्हाट्सऐपीकरण-1

   गिरीश पंकज चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद मानव जीवन मिला है, उसे 'व्हाट्सऐप के चक्रव्यूह में फंस कर अभिमन्यु की तरह क्यों नष्ट करें,  ऐसा अच्छा-अच्छा  मैं सोचता था. और सुखी भी था, मगर लोग हैं कि समझते ही नही. नया खिलौना है, मज़ा आ रहा है....

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धरना बनाम किटी पार्टी 

धरना बनाम किटी पार्टी 

गिरीश पंकज किसी महिला से बलात्कार के बाद  विरोध में धरना-प्रदर्शन किया जाता है। करना ही चाहिए. हम और कुछ तो कर नहीं सकते. सिस्टम कान में तेल डाल कर  पड़ा रहता है।  उसे जगाने के लिए धरना-प्रदर्शन और भाषण ही एक तरीका बचा रहता है।  तो महिलाएं धरने पर...

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जियो हीरोइन जी! आपका आना तो एकदम से गज़ब हो गया 

जियो हीरोइन जी! आपका आना तो एकदम से गज़ब हो...

 गिरीश पंकज जियो-जियो, हीरोइन जी ! आपने हमें दर्शन दिया।  आपके चरण इस धरा पर पड़े, तो बॉलीवुड की कसम, हम सब धन्य-धन्य हो गए।  बाकी लोग धन्य हुए या नहीं,  यह तो पता नहीं लेकिन अपन तो भयंकर धन्य-धन्य हो गए. हमारे इलाके में जब तक कोई हीरो या...

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आँख-से-आँख मिलाइए जीवन को सुखी बनाइए-2 

आँख-से-आँख मिलाइए जीवन को सुखी बनाइए-2 

(गतांक का शेष ) मैंने मुस्कराते हुए कहा, "आपकी जुबान पर यह घोटाला शब्द कैसे आ गया? तो वह थोड़ा- सा शर्मसार होते हुए बोले, "क्या करें, लंबे समय तक घोटालों के बीच में रहते-रहते यह शब्द हमारी आत्मा का हिस्सा बन चुका है। मैंने कहा, ' अपने ठीक ही...

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आँख-से-आँख मिलाइए  जीवन को सुखी बनाइ

आँख-से-आँख मिलाइए  जीवन को सुखी बनाइ

गिरीश पंकज वह पार्टी अब अपना चुनाव चिन्ह बदलने के मूड में है।   पहले 'हाथ रखा था, अब वह 'आँख रखने पर विचार कर रही है।  चुनाव चिन्ह समय-समय पर बदलने की परम्परा भी रही है।  पहले इस पार्टी का चुनाव चिन्ह था. दो बैल, फिर हुआ गाय-बछड़ा, उसके बाद...

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कोई तारीफ़ करे तो गुदगुदी होने लगती है 

कोई तारीफ़ करे तो गुदगुदी होने लगती है 

  गिरीश पंकज  पिछले दिनों दिल्ली की युवा व्यंग्यकार शशि पांडेय ने मुझसे एक मज़ेदार साक्षात्कार लिया।  उसके महत्वपूर्ण अंश देखें - प्रश्न - आप व्यंग्य क्यों लिखते हैं ? उत्तर - क्योंकि हम कुछ और लिख भी नहीं सकते न। और हाथों की खुजली का क्या करें, जो अक्सर...

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गाय की अंतिम इच्छा 

गाय की अंतिम इच्छा 

गिरीश पंकज एक शहर में एक गाय रहती थी। गाय के साथ अनेक गायें भी थीं।  गाय मतलब सीधी-सादी। गाय  का मतलब ही हो गया है जो सीधा-साधा हो. तो एक सीधी-सादी गाय थी।  बहुत जल्दी उसकी दोस्ती कुछ कूकुरों से हुई, फिर सूअरों से भी उसकी अच्छी पहचान हो...

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सरकार अँखियों से नहीं,  बन्दूक से गोली मारे ... 

सरकार अँखियों से नहीं,  बन्दूक से गोली मारे ... 

हीरोइन अखियों से गोली मार कर दिल कर देती है लेकिन सरकार ऐसा नहीं करती।  वह सीधे बन्दूक से  मारती है और जीवन को ही खल्लास कर देती है।  पुलिस ने गोली चलाई, तो कुछ  प्रदर्शनकारी किसान मर गए।  लोगों ने सरकार की निंदा की। लेकिन हम इकलौते जीव हैं...

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अगले जनम मोहे बकरी ही कीजो

अगले जनम मोहे बकरी ही कीजो

 किसी शहर में कुछ बकरियां रहा करती थी । शहर की कृपा से वे  निरंतर मोटी-ताजी होती जा रही थीं।  हालांकि बकरियों को इस बात की भी चिंता सताती थी कि कहीं किसी कसाई ने देख लिया, तो उनका काम तमाम कर देगा और वे न जाने कितने लोगों के...

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अँखियों से गोली मारे 

अँखियों से गोली मारे 

गिरीश पंकज एक समय था, जब यह गाना कितना लोकप्रिय हुआ था,  'लड़का कमाल का है  अँखियों से गोली मारे. लोग भूल गए थे, गाना लेकिन अब सबको याद आ गया क्योंकि एक बार फिर कमाल हो गया। उन्होंने संसद में आँख क्या मारी,  निंदा की महामारी फैल गई. अरे भाई,...

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 मुँह में चुटकीभर शक्कर 

 मुँह में चुटकीभर शक्कर 

ज़ख्मी शेर काफी खूंखार हो जाता है। उसी तरह पराजित दल और उसके हारे हुए प्रत्याशी भी पगला जाते है । उनकी हरकतें देखने लायक रहती हैं। हरकतें ऐसी कि टिकट लगा कर दिखाई जायें तो सरकार की अच्छी खासी कमाई हो जाए। यह पारम्परिक सत्य है कि जो जीतता...

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भूख के मामले में नंबरी हम

भूख के मामले में नंबरी हम

गिरीश पंकज अभी-अभी पता चला है कि हमारा देश दुनिया भर में भूख के मामले में सौ नंबर पर आकर टिक गया है। भइये, यह दुख की बात नहीं, खुशी की बात है। सोचो जरा, कहीं तो हमारी अपनी एक वैश्विक पहचान है । दुनिया के सौ  भुक्खड़ देशों में...

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मुखड़ा क्या देखे दर्पण में

मुखड़ा क्या देखे दर्पण में

गिरीश पंकज फिल्म हिट हो गई भाया ! फिल्म को हिट करना एक कला है. करोडो की  चली तो निर्माता कटोरा थामने पर मज़बूर हो सकता है इसलिए समझदार निर्माता फिल्म की शूटिंग के समय से ही मार्केटिंग में लग जाता है ;कुछ लोगों को हायर करता है।  और कहता है...

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 हाउसफुल वृद्धाश्रम !

हाउसफुल वृद्धाश्रम !

  अपने देश की ट्रेनों में अक्सर वेटिंग का सामना करना पड़ता है। लम्बी वोटिंग लिस्ट रहती है।  अब ऐसी वेटिंग  लिस्ट यानी प्रतीक्षासूची ओल्डएज होम उफऱ् वृद्धाश्रमों में भी देखी जाने लगी है। इसका सीधा -सीधा  मतलब यही है कि हमारा देश प्रगति कर रहा है।  सुयोग्य संताने अपने...

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अभी से सिरफुटौव्वल -2

अभी से सिरफुटौव्वल -2

अभी से सिरफुटौव्वल -2 (कल का शेष ) दावेदार ने कहा, मैंने सुना है कि मंत्री को कि कोई खास योग्यताएं नहीं होती।  अंगूठा छाप शिक्षा मंत्री बन जाता है।  जिसे कानून की समझ नहीं होती, वह विधि मंत्री बन जाता है। और जो जीवन भर खेलों से दूर रहता...

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अभी से सिरफुटौव्वल -1

अभी से सिरफुटौव्वल -1

गिरीश पंकज  चुनाव का समय अभी दूर था, लेकिन उस दल के हर व्यक्ति को मंत्री बनने की पड़ी थी. पाँच -दस  तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे और लगभग सौ लोग  मंत्री बनने के लिए बेताब थे।  पार्टी का एक नेता भाषण दे रहा था, इस बार हम सब...

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जनता है फुटबॉल, उसको लतिया रहे हैं राजनीति के लाल!

जनता है फुटबॉल, उसको लतिया रहे हैं राजनीति के लाल!

  गिरीश पंकज   बहुत पहले नेताजी जब राजनीति में नहीं आए थेए  तब उनका प्रिय खेल हुआ करता था फुटबॉलण् फुटबॉल को जब कभी लात मारा करते थेए तो बहुत खुश हुआ होते थे।  उनका भाव यही रहता था कि चलोए किसी को तो लतिया रहा हूं।  घर में...

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संत जी के बिगड़ैल भक्त

संत जी के बिगड़ैल भक्त

 संत जी के बिगड़ैल भक्त  गिरीश पंकज संत जी ने जो-जो सिखाया, उनके चेले वही सब नहीं सीख सके, कमाल है। संत ने मूर्ति-पूजा का विरोध किया और उनके जाने के बाद उनके भक्तों ने सबसे पहले संत जी की ही मूर्ति बना डाली, फिर उन्हीं की मूर्ति के नीचे...

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मत समझो तुम एक बला है सेल्फी लेना बड़ी  कला है-2 

मत समझो तुम एक बला है सेल्फी लेना बड़ी  कला...

गिरीश पंकज कल का शेष  मैंने पूछा मित्र, कुछ चित्रों में लोग प्रसन्न हो कर हाथ को आड़ा-तिरछा कर लेते हैं। मुँह  भी बिगाड़ लेते है।  क्या यह सत्य  है। मित्र ने परम् ज्ञानियों की तरह मुस्कराते हुए कहा, यह सही है मित्र। सेल्फी लेते वक्त यह भी ध्यान में...

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मत समझो तुम एक बला है सेल्फी लेना बड़ी  कला है-1 कुछ लोगों के लिए 

मत समझो तुम एक बला है सेल्फी लेना बड़ी  कला...

मत समझो तुम एक बला है सेल्फी लेना बड़ी  कला है-1 कुछ लोगों के लिए  गिरीश पंकज भले ही बला हैए  लेकिन आजकल  सेल्फी लेना एक बड़ी कला है। जो इस कला में  माहिर होते है।  वे देर रात तक जागते है  और दिन भर पेल कर सोते है   बहुत बड़ी...

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जादूगर अफसरों को प्रणाम

जादूगर अफसरों को प्रणाम

जादूगर अफसरों को प्रणाम अपने देश के कुछ लोगों या अफसरों का जीवन बड़ा ही जादुई या कहें कि मायावी किस्म का होता है।  इस कला को वे उस दिन से अर्जित कर लेते हैं, जब वे मनुष्य जीवन से छुट्टी प्राप्त कर के अफसर या अधिकारी हो जाते हैं।...

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