जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा बेहाल

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मुंगेली (नव प्रदेश)
जिला अस्पताल में आए दिन चिकित्सकों के ओपीडी में मौजूद न होने की शिकायतें मिलती रहती है। इलाज के लिए आए मरीज एवं उनके परिजन डॉक्टर का घंटों बैठक इंतजार करते हैं। ओपीडी में सहायक की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी बस एक रटा-रटाया जवाब देते हैं कि, साहब अभी कहीं निकले हैं।जब हमारे रिर्पोटर ने इसकी पड़ताल की तो चैकाने वाली हकीकत सामने आई। चिकित्सकों के साथ अन्य स्टाफ भी गायब मिले।
इस अस्पताल में हर दिन इलाज कराने के लिए औसत रूप से लगभग सौ मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें करीब 50मरीज मेडिसिन विभाग में दिखाते हैं। चिकित्सकों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को हर दिन भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन के पास एक ही जबाव होता है कि चिकित्सकों की कमी है। आने वाले लोग यह सवाल भी विभाग के जिम्मेदारों से आए लापरवाही की शिकायत करते हैं। जिम्मेदार भी चिकित्सक और स्टाफ की कमी का बहाना बनाकर उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं। विभाग के जानकारों का कहना है कि स्वीकृत 15 पदों में से 5 पद अभी भी रिक्त है। जिला चिकित्सालय में बचे 10 पदों में से मात्र 5 चिकित्सकों के भरोसे हर दिन भारी संख्या में मरीजों का इलाज करना काफी कठिन काम है। जबकि इनकी संख्या दो गुना होना चाहिए। विभाग के जानकारों का कहना है कि यहां तैनात चिकित्सक दबाव में काम करने को मजबूर हैं। ओपीडी में इलाज के अलावा उन्हें पोस्टमार्टम और इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी पड़ती है। चिकित्सकों की कमी का आलम यह है कि शिशु विशेषज्ञ एवं रेडियोलाजिस्ट विभाग के चिकित्सक को गेस्ट चिकित्सक के तौर पर बुलाया जाता है। यह सप्ताह में एक दिन आकर मरीजों को देखते हैं। यदि खाली विभाग में चिकित्सकों की तैनाती कर दी जाय तो न केवल मरीजों को सही समय से इलाज मिल सकेगा।
ओपीडी में चिकित्सक समय से नहीं बैठते हैं- जिला चिकित्सालय ओपीडी में अधिक्तर डा. नदारत होते है। शिशु रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त होने के कारण लोगो को अपने बच्चो के ईलाज के लिए निजि चिकित्सालय की ओर रूख करना पडता है। ओपीडी में लगे डा. के समय पर नही बैठने के कारण भी मरिजो को लंबी कतार लगानी पडती है। प्रशासन के द्वारा झोलाछाप डा. पर नकेल कशने के बाद जिला अस्पताल में अप्रत्याशित रूप से मरिजो की भीड रहती है। किंतु डाक्टरों की कमी के कारण जिला अस्पताल की हालत दिनो दिन खराब होते जा रही है । ऐसा नहीं है, जिन चिकित्सक की ड्यूटी होती है वह मरीजों को देखते हैं। कई बार इमरजेंसी होने के कारण डॉक्टर को वार्ड में जाना पड़ता है। यह नौबत कुछ समय के लिए कभी-कभार आती है।

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