यात्री बसों का कितना किराया है पता नहीं

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जिला मुख्यालय में परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की खाली पड़ी कुर्सी का खामियाजा और आरटीओ की मौन स्वीकृति की कीमत चुकाते यात्री
जानकारों की माने तो परिवहन विभाग के कर्मचारीयों ने पिछले लगभग 3 साल से इस मार्ग पर कोई कार्यवाही नही की है विभाग के कर्मचारी कोपरा और पांडुका से ही कार्यवाही करके चले जाते है इस मार्ग पर आने की जहमत नही उठाते है जिसके चलते बस आपरेटर भी बेख़ौफ़ होकर अतरिक्त किराया लेते है
ऐसे समझे यात्रियों के जेब से होने वाली लूट के गणित को गरियाबंद से देवभोग मार्ग पर
1 यात्री- 5 रुपये 3 1,000= 5,000 (1 दिन का)
5,0003 30 दिन=1 लाख 50 हजार (महीने का)
1 लाख 50 हजार 3 12 महीने=18 लाख (सालाना)
18 लाख 3 3 साल = 54 लाख रुपये
गरियाबंद (नवप्रदेश)
जिला मुख्यालय बने 5 साल होने बाद भी गरियाबन्द जिले में आर टी ओ कार्यालय तो है लेकिन आज पर्यन्त तक किसी जिम्मेदार अधिकारी की पोस्टिंग नही हो पाने के कारण गरियाबंद से देवभोग मार्ग पर चलने वाली बसों के आपरेटरों की मनमानी और निर्धारित दर से ज्यादा किराया लेने का बोझ जनता की जेब पर अब भारी पडऩे लगा है और गरियाबंद आरटीओ की इस निष्क्रियता की भरपाई की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है यात्रियों की शिकायत की सुनवाई नही होने के चलते बस आपरेटर अपनी जेबे भरने में कोई कसर नही छोड़ रहे है जिला मुख्यालय बनने के बाद से आस पास के क्षेत्रों से विभागीय एवं अन्य कार्यो हेतु लोगो का आना जाना बढ़ा है देवभोग क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार नही होने के चलते सभी को जिला मुख्यालय या रायपुर का रुख करना पड़ता है परंतु निन्म वर्ग के लोगो से निर्धारित दर से अधिक किराया लेने के चलते इन गरीबों पर दोहरी मार पड़ रही है गरियाबंद से देवभोग मार्ग जाने वाली बसों की बात करे तो मुख्यालय से रोजाना लगभग 32 से 35 बसे आना जाना करती है गरियाबंद से देवभोग का किराया 120 से 130 तक लिया जाता है और स्थानीय बुकिंग कर्मचारियों की माने तो लगभग 950 से 1 हजार लोगों का आना जाना होता है एक आदमी से 5 रुपये के लगभग अधिक किराया लिया जाता है 1 आदमी से 5 रुपये तो दिन भर में 1 हजार यात्रियों का होता है लगभग 5 हजार रुपये और महीने का हुआ 1 लाख 50 हजार रुपये और साल भर का 18 लाख रुपये इस प्रकार अगर पिछले 3 सालों के ही किराया जोड़े तो लगभग 54 लाख रुपये की चपत इस मार्ग पर आना जाना करने वाले यात्रियों को पड़ चुकी है और यह सिस्टम वर्तमान में चालू है अब इतने बड़े खेल में आरटीओ की भूमिका भी संदेह के दायरे में आती है मात्र गरियाबंद से देवभोग मार्ग का यह हाल है तो जिला मुख्यालय से अन्य मार्गो में चलने वाली यात्री बसों में होने वाली अवैध लूट का अंदाजा आप लगा ही सकते है। गरियाबन्द से देवभोग सफर करने वाले मनोज साहू से बात करने पर उन्होंने बताया कि उनसे 120 रुपये किराया लिया गया है देवभोग निवासी उपेंद्र सिन्हा, डिक्सन कश्यप एवं नंदू यादव ने बताया की इन सभी ने 120 रुपये किराए का दिया है एक शासकीय कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह हर हफ्ते गरियाबन्द से देवभोग मार्ग पर यात्रा करते है और हर बार उन्हें 120 रुपये किराया ही चुकाना पड़ता है।
इस बारे में जब स्थानीय जिला परिवहन अधिकारी के कार्यालय में जा कर बात करनी चाही तो वँहा पर बैठे बड़े बाबू लक्ष्मी प्रसाद मन्नेवार ने पहले तो किसी भी अधिकारी का नं नही होने की बात कही और बताया कि हम केवल ऑफिस वर्क देखते है बाकी सब तिग्गा साहब ही बता पाएँगे । तिग्गा साहब को जब फोन लगा कर बात करनी चाही तो उनका फ़ोन नं 9827880633 हमेशा की तरह बंद आया जिस पर बड़े बाबू का कहना था कि उनका फ़ोन अधिकतर बंद ही राहता है वे महासमुंद और गरियाबंद दोनो के प्रभारी है महीने में एकाधबार आ जाते है इस बारे में ज्यादा जानकारी वही दे पाएंगे ।
देवभोग क्षेत्र में सुविधाओं की कमी है जिसके चलते लोगों को अपनी समस्याओं का निराकरण करने जिला मुख्यालय या फिर राजधानी का रुख करना पड़ता है और उसमें बस वालों की मनमानी के चलते गरीब लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है इस तरह की लूट बंद होना चाहिए ।
देवेंद्र ठाकुर, अध्यक्ष गरियाबंद जिला सरपंच संघ
पिछड़ा हुआ क्षेत्र होने के चलते और संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए शासन को तत्काल ऐसे बस संचालकों पर लगाम कसते हुए कार्यवाही करना चाहिए ।
जनक धु्रव,
प्रदेश महासचिव अजजा प्रकोष्ठ काँग्रेस
निर्धारित दर से अधिक किराया लेने की बस संचालकों की शिकायत कई बार मिल चुकी है परंतु विभागीय उदासीनता के चलते कोई कार्यवाही नही हो रही है जिसके चलते ये बस संचालक आदिवासी बहुल क्षेत्र के सीधे साधे लोगो को लूट रहे है ।
संजय नेताम
जनपद सदस्य मैनपुर एवं उपाध्यक्ष जिला युवा कांग्रेस

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