धान रखने के लिए सात करोड़ रुपए के बने चबूतरे नहीं आ रहे काम

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जांजगीर-चांपा. (नव प्रदेश)
जिले के 206 समितियों के 25 फीसदी समिति में धान के रखने प्रशासन ने सात करोड़ रुपए में चबूतरे का निर्माण किया गया था। ताकि समितियों में रखे धान सुरक्षित रखा जा सके, लेकिन अधिकतर समितियों के चबूतरा बेकाम साबित हो रहा है। चबूतरे को ऐसे स्थान में बनाया गया है जो समितियों से कोसों दूर है। जिसमें आज तक धान का रखाव नहीं किया गया है। इसके चलते समितियों में सात करोड़ से निर्मित चबूतरा कौड़ी काम ? के नहीं है। समितियों में धान को सुरक्षित रखने चार- पांच साल पहले प्रशासन ने करोड़ो की लागत से चबूतरे का निर्माण किया है। प्रत्येक समितियों के चबूतरे के लिए 22-22 लाख रुपए खर्च किए गए थे। 22 लाख रुपए में तीन-तीन लाख रुपए की लागत से सात से आठ चबूतरे का निर्माण किया गया है। इन चबूतरे का निर्माण ऐसे स्थान में किया गया है जहां समिति ही नहीं है। अलबत्ता चबूतरे का निर्माण बेकाम साबित हो रहा है। समितियों में जहां धान खरीदी हो रही है वहां धान जमीन के नीचे भूसा वगैरह रखकर धान का छल्ली लगाई गई है। जबकि इन छल्लियों में दीमक व अन्य कीटप्रकोप की संभावना बनी रहती है। दीमक को देखते हुए जहां चबूतरे का निर्माण किया गया है वहां के चबूतरे में अधिकतर स्थान में अन्य प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां चबूतरे का निर्माण किया गया है वहां अब सब्जी बाजार लगता है। जल उपभोक्ता संस्था के सदस्य कि ग्रामीण कब से मांग करते आ रहे हैं यहां चबूतरे का निर्माण किया गया है वहां धान की खरीदी की जाए, लेकिन ग्रामीणों की मांग अब तक नहीं सुनी गई।
ग्राम पंचायत में चबूतरे का निर्माण में किया गया है। जबकि में धान खरीदी हाईस्कूल के खेल मैदान में किया जा रहा है। हाईस्कूल मैदान में धान मंडी लगने से स्कूली छात्रों को खेल कूद के लिए स्थान नहीं मिल पा रहा है। मैदान में धान खरीदी होने से यहां के बच्चे चार महीने के लिए खेल से वंचित हो जाते हैं।
गौरव ग्राम में धान की खरीदी मुड़पार के खेल मैदान में हो रहा है। जबकि यहां के 22 लाख रुपए के चबूतरे का निर्माण ऐसे स्थान में किया गया है जहां आज तक धान का एक बीज भी नहीं पहुंच पाया है। यहां का चबूतरा गांव के बाहर आश्रम रोड के खाली पड़े स्थान में बनाया गया है। जहां इसकी उपयोगिता कौड़ी काम की नहीं है।
ग्राम पंचायत में धान की खरीदी सुकली रोड में की जाती है। यहां हर साल धान खरीदी का स्थान बदलते रहता है। जबकि यहां धान रखने के लिए चबूतरे का निर्माण पॉलिटेक्निक ग्राउंड के करीब खाली पड़े ग्राउंड में किया गया है। यहां आज तक एक बीच भी धान नहीं रखा गया है। चबूतरे की उपयोगिता समिति प्रभारियों को आज तक नजर नहीं आई।

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