नए वर्ष को यादगार बनाने कवर्धा के ऐतिहासिक स्थलों में पहुंचेगें देश-विदेश के पर्यटक

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कवर्धा (नवप्रदेश)
बीता हुआ कल कुछ न कुछ आते हुए नये पल के साथ एक बार फिर सचित्र आखों के सामने मन से तरोताजा नजर आता है। कुछ खट्टी मीठी बातें तो कुछ अपनों के साथ बिताये हुए पल को लोग नये साल के आगमन के साथ ही याद करते है। आज जहां 31 दिसम्बर की रात को पुराने साल को विदाई देते हुए, लोग नये साल का स्वागत करेंगे। तो कुछ ऐसे भी है, जो अपनी कुछ नषा पानी की आदतों को छोडनें वादे भी करते है। एक ओर जहां युवा इस वर्श को धूमधाम से मनाने की तैयारी 31 तारीख की रात को 12 बजे नए वर्श का स्वागत करेंगे। वहीं लोग मंदिरों मे जाकर पूजा-अर्चना भी करेंगे।
सैर सपाट का आनंद लेने के लिए जगह नहीं सूझ रही हे। उन्हें यह बता दें कि षहर के आसपास ऐसी ढेरों जगह है, जो नए साल पर घूमने लायक और मनोरंजक भी है। इस स्थानों में धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व के जगह है। यह सभी ऐसी जगह है, जहां बारिष के दिनों को छोडकर वर्शभर दूर-दूर से पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। जिले के आसपास बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव व अन्य जिलों से लोग घूमनें के लिए आते है। इसके अलावा विदेषी पर्यटक भी यहां आते है, और सैर सपाटे का खुब आनंद उठाते है।
मंडवा महल
भोरमदेव मंदिर से आधा किमी दूरी पर चैर ग्राम के समीप पत्थरों से निर्मित षिव मंदिर है। ऐसी जनश्रुति है कि इस मंदिर में विवाह संपन्न कराये जाते रहे है। विवाह मंडप के रूप में प्रयुक्त होने के कारण मंडवा महल कहा जाता है। मंदिर के बाह्य दीवारों पर मिथुन मूर्तियां बनी हुई है। गर्भगृह का द्वार काले चमकदार पत्थरों से बना हुआ है। मंडवा महल की इस सुंदरता के कारण ही वर्शभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। नए साल का स्वागत करने के लिए यह स्थान बहुत अच्छा माना जा रहा है।
आकर्शित करता छेरकी महल
भोरमदेव मंदिर समूह का एक मंदिर है, जिसके आकर्शक पत्थर के चैखट और भित्तीय चित्र बने है। प्राचीन काल से अब तक बकरों की गंध से भरी रहती है, जो किसी कौतुहल से कम नहीं है। यह महल भोरमदेव मंदिर से महज आधे किलोमीटर पर स्थित है। भोरमदेव आने वाले पर्यटकों को छेरकी महल सहज ही आकर्शित करता है। नए वर्श मनाने वालों के लिए यह बेहतर विकल्प है।
विरासत पचराही
पचराही आज न केवल देष वरन् विदेषों में भी चर्चा को केन्द्र बिन्दु है। बोडला से 12 किमी दूर हॉफ नदी का मनोरम तट इस बात का गवाह है कि यहां हजारों वर्श पूर्व मानव सभ्यता पल्लवित और पुश्पित थी। पचराही में उत्खनन के बाद विषालकाय भवनों, मंदिरों और प्राचीन मूर्तियों के अवषेश मिले है। हाफ नदी के एक ओर पचराही और दूसरी ओर जैन तीर्थ बकेला स्थित है। ऐसा लगता है कि महान नदी घाटी सभ्यता सिंधु और मिश्र की याद दिलाते है। यह स्थान मनोरंजक होने के साथ ही ज्ञानवर्धक भी है। लिहाजा यहां नया वर्श मनाना अच्छा रहेगा।
1999 में हुआ निर्माण
बोडला से महज 7 किमी दूरी पर छीरपानी जलाषय स्थित है। बांध की उचांई 46.12 मीटर है। इसका विस्तार 1020.98 एकड तक फैला हुआ है। इस जलाषय का निर्माण अगस्त 1999 को हुआ था। मध्यम परियोजना के तहत बनी बांध की सुंदरता देखते ही बनती है। यहां हर साल पिकनिक मनाने के लिए सैकडों लोग पहुंचते है।
आस्था का केन्द्र चरणतीरथ
वहीं 30 किमी दूर ग्राम तरेगांव में चरणतीरथ पर्यटन स्थित है। यदि आप नए साल मनाने के लिए धार्मिक स्थल की खोज कर रहे है, तो चरणतीरथ उस पर खरा उतरती है। कहा जाता है कि चरणतीरथ में भगवान श्रीराम की चरणपादुका है, इसके उपर चट्टानों से पानी रिसकर गिरता रहता है। यही वजह है कि इसे चरणतीर्थ का नाम दिया गया। बोडला से 10 किमी दूर रानीदहरा जलप्रपात पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। रानीदहरा के नाम से ही इसकी सुंदरता झलकती है। इसके नाम का अर्थ पहाडों की रानी होता है। रानीदहरा की पहाडी से निरंतर पानी गिरता रहता है।

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