उत्तर गुजरात में 17 सीटें जीतने वाली कांग्रेस के खिलाफ इस बार पार्टी के ही 16 बागी मैदान में

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नई दिल्ली। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए भाजपा से कहीं ज्यादा उसके बागी सिरदर्द बने हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहे उत्तर गुजरात में बागी नेता पार्टी की जड़ खोदने में लगे हैं। राज्य का यह वो क्षेत्र है जहां मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस जीत का परचम लहराती रही है। यहां से कांग्रेस के 16 बागियों ने चुनावी मैदान में उतरकर पार्टी के लिए सत्ता में वापसी की राह में रोड़ा बन गए हैं।
उत्तर गुजरात में छह जिले आते हैं, इनमें गांधीनगर, बनासकांठा, साबरकांथा, अरवली, मेहसाना और पाटन है। इन जिलों में 32 विधानसभा सीटें है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 32 सीटों में से 17 सीटें और बीजेपी ने 15 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन अब इसी उत्तर गुजरात में 16 बागी कांग्रेस के खिलाफ मैदान में हैं और उन्होंने पार्टी के अधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। इससे कांग्रेस का समीकरण बिगड़ता हुआ नजर आ रहा है। इसके अलावा पिछली दफा कुछ सीटें ऐसी भी रही, जहां पार्टी ने बहुत कम मार्जिन से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा चुनौती उत्तर गुजरात के बनासकांठा जिले में है। कांग्रेस के सामने यहां की थारद, वडगाम, देसा, देवदार और कंकरेज विधानसभा सीटों पर बागी मैदान में उतर आए हैं। थारम में कांग्रेस ने बीडी राजपूत को मावजीभाई पटेल के जगह मैदान में उतारा है। जबकि 2012 में मावजी पटेल बीजेपी के परबातभाई पटेल से 3473 वोटों से हारे थे। इस मावजीभाई पटेल बागी के रूप में मैदान में हैं उन्होंने अपने नाम वापस लेने से इनकार कर दिया है।
दलित नेता जिन्नेश मेवाणी को कांग्रेस ने वाडगाम विधानसभा सीट से उतारा है। वाडगाम कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट को 21000 मतों से जीत दर्ज की थी। ऐसे में अपने सिटिंग एमएलए को हटाकर मेवाणी को टिकट देने से यहां भी बगावत के सुर फूट चुके हैं। यहां से मेवाणी के खिलाफ कांग्रेस के बागी अश्विन परमार और बालकृष्ण जिरावल चुनाव लड़ रहे हैं।

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