कुपोषण से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी

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नई दिल्ली। देश में कुपोषण की विकराल समस्या के समाधान के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू करते हुए सरकार ने जन आंदोलन शुरू करने और पोषण केंद्रों की स्?थापना का फैसला किया है जिससे बच्चों में ठिगनेपन, अल्?प पोषाहार, रक्?त की कमी तथा जन्?म के समय कम वजन की समस्याओं से निपटा जा सकेगा।
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की वर्ष 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुपोषित लोगों की संख्या 19.07 करोड़ है। यह आंकड़ा दुनिया में सर्वाधिक है। देश में 15 से 49 वर्ष की 51.4 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। पांच वर्ष से कम उम्र के 38.4 फीसदी बच्चों की अपनी आयु के मुताबिक लंबाई कम है। इक्कीस फीसदी का वजन अत्यधिक कम है। दुनिया भर में 80 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार है। सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए विभिन्न मंत्रालयों की कई योजनाओं और कार्यक्रमों में समन्वय के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन गठित करने की घोषणा की है। इन कार्यक्रमों और योजनाओं का संचालन महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है।
यह मिशन मंत्रालयों के पोषण संबंधी कार्यक्रमों और योजनाओं की निगरानी तथा मार्गदर्शन करेगा। कुपोषण से निपटने के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करेगा। निगरानी करने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा और आंगनवाडिय़ों में बच्चों की लंबाई भी मापी जाएगी। मिशन का मुख्य जोर पोषण के संबंध में जन आंदोलन शुरु करना है। इसके लिए सामाजिक जागरुकता पर जोर दिया जाएगा। पोषण आहार के केंद्र में किशोरियां, गर्भवती महिलाएं और बच्चे होंगे। पूरे देश में पोषण केंद्रों की स्थापना की जाएगी और इनको आंगनवाडिय़ों से जोड़ा जाएगा।

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