श्रीलंका पर बढ़त बनाने उतरेगा भारत

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नागपुर। भारतीय क्रिकेट टीम उतार चढ़ाव से भरे पहले ईडन गार्डन टेस्ट के बाद यहां शुक्रवार से शुरू होने जा रहे दूसरे नागपुर टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ पिछली गलतियों से सबक लेते हुये बढ़त के इरादे से उतरेगी। भारत को श्रीलंकाई टीम ने कोलकाता में हुये पहले टेस्ट में कड़ी टक्कर दी थी और अपने खिलाफ लगातार 10वीं जीत से भी वंचित किया। इस मैच में बारिश की अहम भूमिका रही और टीम इंडिया की शुरूआत भी निराशाजक रही थी। लेकिन पांचवें दिन तक आते आते नंबर एक टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली ने अपनी नाबाद 104 रन की शतकीय पारी से मुकाबला पलट कर रख दिया और मैच अंतत: ड्रा समाप्त हुआ। हालांकि इस मैच में भी टीम इंडिया जीत से मात्र तीन विकेट ही दूर थी लेकिन खराब रौशनी ने श्रीलंका का साथ दिया। लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं की मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने पहली पारी में खासा निराश किया और एक बार फिर दिखा दिया कि बहुत हद तक रनों के लिये विराट पर निर्भर हो गयी है जो शून्य पर आउट हुये तो चेतेश्वर पुजारा को छोड़कर फिर अन्य कोई बल्लेबाज़ खड़े होने का जज्बा ही नहीं दिखा सका। श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्टों की सीरीज़ में अब दूसरा मैच जीतकर भारत के पास 1-0 की बढ़त लेने का सुनहरा मौका रहेगा जबकि विपक्षी टीम भी इस मैच में जीत के इरादे से उतरेगा। भाारतीय टीम में नागपुर में दो अहम बदलाव देखने को मिलेंगे जिसमें तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार शादी के चलते बाकी दोनों मैचों से बाहर रहेंगे तो शिखर नागपुर मैच में नहीं खेलेंगे। भुवी की कमी हालांकि नागपुर में महसूस की जा सकती है जहां एक बार फिर ग्रीन टॉप की उम्मीद है। तेज़ गेंदबाज़ों के लिये ग्रीन टॉप पिचें मददगार मानी जाती हैं और ईडन में भुवनेश्वर आठ विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज़ रहे थे। भुवी ने कोलकाता की जीवंत पिच पर जिस तरह उछाल और तेज़ी से श्रीलंकाई बल्लेबाजों को नियंत्रित किया वह काबिलेतारीफ था और इसकी बदौलत वह मैन ऑफ द मैच भी बने। भुवनेश्वर की उनकी अनुपस्थिति में इशांत शर्मा टीम में तीसरे तेज़ गेंदबाज़ की तरह शामिल हो सकते हैं और उमेश यादव तथा मोहम्मद शमी की तिकड़ी एक बार फिर नागपुर में अहम होगी।
कोलकाता में जहां भारतीय तिकड़ी ने 17 विकेट निकाले तो वहीं श्रीलंका के तेज़ गेंदबाज़ों को सफलता हाथ लगी थी और विराट एंड कंपनी को इस बात को ध्यान में रखते हुये अपनी रणनीति तय करनी होगी।
श्रीलंका के लिये तुरूप का इक्का साबित हुये तेज़ गेंदबाज़ सुरंगा लकमल ईडन में 119 रन पर सात विकेट के साथ सबसे प्रभावशाली रहे थे। उनके साथ दासुन शनाका और लाहिरू गमागे ने भी मिलकर भारत की पहली पारी 172 पर ही समेट दी थी। टीम के कोच निक पोथास ने माना कि उनकी टीम ने मैच में पांच में से चार दिन भारत से बेहतर खेला और वह नागपुर में पासा पलट सकते हैं।
जाहिर है कि इसी वर्ष भारत से 0-9 से शिकस्त झेलने के बाद श्रीलंका का भारत की जमीन पर इस तरह का प्रदर्शन मनोबल बढ़ाने वाला है। श्रीलंका ने भारत में कभी भी टेस्ट नहीं जीता है लेकिन भारत दौरे से पहले यूएई में पाकिस्तान को दो टेस्टों में मात देकर उसका मनोबल बढ़ा है और पहले के मुकाबले उसके खेल में व्यापक सुधार भी देखने को मिला है।
भारतीय सलामी बल्लेबाज़ लोकेश राहुल ने भी माना है कि बल्लेबाज़ों के लिये इस तरह की पिचों पर खेलना आसान नहीं है और विदेशी दौरों में उन्हें इसी तरह की विकेटों पर खेलना होगा। यदि ईडन की जीवंत पिच पर टीम इंडिया के बल्लेबाजी प्रदर्शन को देखा जाए तो पहली पारी में साफ दिखा कि राहुल, धवन, विराट, अजिंक्या रहाणे रविचंद्रन अश्विन सभी से विकेट को समझने में गलतियां हुईं और वह गलत शॉट खेलकर आउट हुये।
चेतेश्वर पुजारा एकमात्र ऐसे बल्लेबाज़ थे जिन्होंने विकेट पर टिककर रन बनाये और मुश्किल स्थिति में भी अर्धशतक पूरा किया और नागपुर में फिर से उनकी अहमियत रहेगी। भारत की दूसरी पारी में हालांकि धवन, राहुल और विराट ने खुद को तुरंत इस विकेट के अनुरूप ढाला लेकिन रहाणे और अश्विन बाद में भी इस विकेट को पढ़ नहीं सके। खुद विकेटकीपर बल्लेबाज़ रिद्धिमान साहा ने भी अपने बयान में कहा कि निचले क्रम के खिलाडिय़ों को और बेहतर ढंग से योगदान देना होगा।
श्रीलंका को देखें तो अनुभवी एंजेलो मैथ्यूज, कप्तान दिनेश चांडीमल, निरोशन डिकवेला और लाहिरू तिरिमाने का प्रदर्शन ग्रीन पिच पर काफी अच्छा रहा। तिरिमाने और मैथ्यूज की अर्धशतकीय पारियां तथा नौवें बल्लेबाज़ रंगना हेरात की 67 रन की पारी से साफ था कि जब भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम ढह गया तब श्रीलंकाई बल्लेबाज़ उनसे बेहतर साबित हुये।
माना जा रहा है कि दूसरे टेस्ट के लिये नागपुर की पिच को घास का कवर दे रखा है और शुक्रवार को दूसरा टेस्ट शुरू होने तक इसका ग्रीन टॉप स्वरूप बना रहेगा। संबंधित अधिकारियों के अनुसार मैच के पहले हॉफ में स्पिनरों की भूमिका मामूली रहेगी और वे अंतिम दो दिन ही कुछ असर छोड़ पाएंगे। वैसे भी कोलकाता में अश्विन और रवींद्र जडेजा को ज्यादा मौका नहीं मिला था। इसलिये फिर से तेज़ गेंदबाज़ों की तिकड़ी पर भारतीय खेमा निर्भर रहेगा जिनपर मैच में 20 विकेट निकालकर बढ़त दिलवाने का दबाव होगा।

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