मुख्यमंत्री के निर्देश पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी, गांव-गांव बिजली पहुंचाने अधिकारियों ने किया जनसंवाद

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  • 15 करोड़ की लागत से सुकमा में और लगभग 10 करोड़ की लागत से दोरनापाल में सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा हैं-परदेशी

दोरनापाल (नवप्रदेश)। सुकमा जिले के दोरनापाल के विश्राम भवन परिसर में आयोजित संवाद शिविर में विशेष सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परेदशी, प्रबंध निदेशक ऊर्जा व सीईओ क्रेडा अंकित आनन्द, कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य और पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा भी पहुंचे। कुछ दिन पूर्व आयोजित कलेक्टर कॉन्फ्रेन्स में मुख्यमंत्री के प्राप्त निर्देशानुसार सुकमा जिला में विद्युत व्यवस्था में वृद्धि के लिए ग्रामीणों से चर्चा करने पहुंचे। जिला सुकमा के लगभग 113 गांवों में विद्युत व्यवस्था व सौर ऊर्जा से विद्युत व्यवस्था का क्रियान्वयन करने में हो रही दिक्कतों को समझने के लिए आला अधिकारी ग्रामीणों से चर्चा किए। इसमें सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के 74 गांवों के सरपंच सविच और ग्रामीण के साथ चर्चा की। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं जिपं अध्यक्ष व सदस्यों ने विद्युत और सौर ऊर्जा से संबंधित समस्या को आला अधिकारियों से साथ साझा किए। इस अवसर पर विशेष सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि लगभग 15 करोड़ की लागत से सुकमा में और लगभग 10 करोड़ की लागत से दोरनापाल में सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा हैं। इस सब स्टेशन के निर्माण से क्षेत्र में विद्युत की कमी को काफी हद तक कम किया जा सकता हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से आवश्यक सहयोग की आवश्यकता बताते हुए संवाद शिविर में शामिल ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों विद्युत व्यवस्था सुधार के संबंध में चर्चा किया गया। जिसमें जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण शासन की योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं, किन्तु नक्सलियों के दबाव में योजना का लाभ नहीं ले पाते। वरिष्ठ अधिकारियों ने केरलापाल में सोलर और दोरनापाल पोटाकेबिन का भी निरीक्षण किया इस अवसर पर कोण्टा क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण सहित एसडीएम कोण्टा प्रदीप कुमार बैध, विद्युत विभाग के संभाग स्तरीय अधिकारी व ईई उईके, क्रेडा विभाग के प्रदीप महेश्वरी, राजस्व, विद्युत व क्रेडा विभाग के अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

जहां तार न पहुंचे वहां सोलर
ज्ञात हो कि नक्सलप्रभावित गांवों में बिजली पहुंचाना आसान काम नही क्योंकि माओवादियों ने कई बार इस इलाके में बिजली के पोल गिराकर काम को प्रभावित किया है । 2006 में लगभग 80 गांव में बिजली के पोल गिराए गए थे वहीं 116 गांव आज़ादी के पहले से प्रभावित हैं । माओवादियों के विरोध के चलते प्रशासन ने निर्णय लिया कि जहां तक तार पहुंच पायेगा वहां बिजली पहुंचाया जाएगा और जहाँ नही पहुंच सकती वहां सोलर से बिजली पहुंचाई जाएगी फिर ग्रामीणों की मांग पर बिजली भी पहुंचे जाएगी । इस हेतु स्थानीय लोगों को रोजगार के भी अवसर दिए जाएंगे ।

बिजली जीवन का महत्वपूर्ण पहलू है। नक्सलप्रभावित गांवों में बिजली पहुंचाने मुख्यमंत्री से हमे निर्देश मिले हैं। इसी जनवार्ता के लिए हम आये हमारा उद्देश्य लोगों के बीच अपनी बात रखनी थी। हम पूरे इलाके में बिजली पहुंचाने को तैयार हैं पर इसके लिए ग्रामीणों,जनप्रतिनिधियों को आगे आना होगा प्रशासन का सहयोग करने ताकि बिना अड़चन के बिजली गांव गांव पहुँचाई जा सके। लोगों को इसको लेकर जागरूक होना होगा पर इससे किसी को हानि नही होनी चाहिए।
सिद्धार्थ कोमल, विशेष सचिव ऊर्जा विभाग

नक्सलप्रभावित इलाके में बिजली पहुंचाना चुनौतीपूर्ण जरूर है पर जहां तक बिजली का तार हम पहुंच सकते हैं हम पहुंचेंगे और जहां बिजली के खम्भे लगाना मुश्किल हो वहां सोलर से घरों हो रौशन करेंगे। जहां सोलर लगे वहां ऐसा नही है कि बिजली नही लगाई जाएगी ग्रामीणों की मांग पर वहां भी बिजली पहुंचाई जाएगी। हालांकि दिसम्बर तक हमे हर गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य मिला है तो हम प्रयासरत है कि काम समय से पूर्ण हो मगर इसके लिए ग्रामीणों ,जनप्रतिनिधियों का समर्थन और सहयोग हमारे लिए अहम है ।
अंकित आनंद, सीईओ ऊर्जा विभाग

बिजली से आदीवासियों की कई मुश्किलें आसान हो जाएंगी ,शिक्षा प्रभावित नही होंगी ,सर्पदंश जैसी घटना कम होगी जीवन स्तर में भी बदलाव आएगा । हम इसके लिए गांव गांव में जागरूकता लाएंगे । मांग को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्रामीणों के सहयोग से ये काम सफल हो पायेगा ।
जयप्रकाश मौर्य, कलेक्टर, सुकमा

सुकमा के नक्सलप्रभावित गांवों में जब बिजली घर घर पहुंचेगी तो जीवन स्तर में सुधार आएगा। सुविधाएं सरकार मुहैया करा रही है उसका लाभ लें। माओवादी अगर इसका विरोध करें तो मिलकर एकता दिखाएं। बिजली केवल लोगों की सुविधा के लिए लगाई जा रही है। हमारा पूरा सहयोग है। 2 माह में बिजली चिंतलनार और 4 माह में जगरगुंडा तक पहुंचाने हम प्रयासरत हैं ।
अभिषेक मीणा, एसपी, सुकमा

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