दीवाली : शुभ मुहूर्त में करें मां लक्ष्मी की पूजा, होगी धनवर्षा

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जांजगीर-चांपा. (नवप्रदेश)
महीने भर की तैयारी के बाद आखिरकार इंतजार की घडिय़ां खत्म हुई और दीपावली का पर्व आ गया। दीपावली पर माता लक्ष्मी का पूजन यदि विधि विधान से किया जाए और आरती के समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो पूजन सफल होता है। दीपावली रोशनी का त्योहार है। यह त्योहार न केवल एक नई शुरुआत करने का है बल्कि धन-दौलत और अच्छे स्वास्थ्य के पाने के लिए भी है। इस दौरान इस त्योहार पर शुभ और अशुभ मुहूर्त का विशेष ख्याल रखना होता है।
माना जाता है कि जहां प्रकाश होता है वहां लक्ष्मी विराजती हैं। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूरे घर को रोशनी से सजाकर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस साल दीपावली 19 अक्टूबर को है। हर त्योहार के पूजन-विधि व शुभ मुहुर्त का अपना एक समय होता है। वैसे ही दीपावली में मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए शुभ मुहूर्त में किया गया पूजा शुभ फल देता है। अगर ष्ठद्ब2ड्डद्यद्ब 2017 के शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन किया जाय तो मां लक्ष्मी अपने भक्तों पर अपार कृपा वर्साती हैं और उसे धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त
इस बार दिवाली का शुभ मुहूर्त शाम 7.18 बजे हस्त नक्षत्र रहेगा। इसके बाद चित्रा नक्षत्र लगने के साथ ही गुरू चित्रा योग शुरू हो जाएगा, जो कि अगले 24 घंटे तक रहेगा।
संध्याकाल की पूजा होती है शुभ
शास्त्रों में दीपावली पर्व पर देवी महालक्ष्मी का पूजन कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की अमावस्या में प्रदोष काल में करने का विधान है। इसके साथ ही ज्योतिषशास्त्र के महूर्त खंड अनुसार दीपावली पर लक्ष्मी का आवाहन और पूजन स्थिर लग्न में करना श्रेष्ठ माना गया है। धन की देवी महालक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए दीपावली पूजन विशेष रुप से शुभ माना जाता है। धन की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल संध्याकाल में करना चाहिए। लक्ष्मी उपासना का यही मुख्य समय माना गया है। संध्या काल में दीप प्रज्ज्वलित कर लक्ष्मी पूजन करने का उत्तम समय है। अमावस्या अंधकार की रात्रि है। अमावस्या अंधकार की रात्रि है। माता लक्ष्मी को समस्त संसार व चराचर को आलौकिक करने वाली देवी माना गया है।
दिवाली के मौके पर व्यापारी बही-खातों, तराजू और नाप-माप के औजारों से ही दिवाली पूजन करते हैं. इस दिन प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन, दीपदान, श्री महालक्ष्मी पूजन व गणेश, कुबेर, बहीखाता, धर्म व गृह-स्थलों पर दीप प्रज्वलित करना शुभ होता है. दिवाली पर बही-खाता पूजन का बड़ा महत्व होता है. इस दिन दिवाली से व्यापारियों का नया साल शुरू होता है.
– बही खातों का पूजन करने के लिए पूजा मुहूर्त समय अवधि में नवीन खाता पुस्तकों पर केसर युक्त चंदन से या फिर लाल कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए. इसके बाद इनके ऊपर ‘श्री गणेशाय नम:Ó लिखना चाहिए. इस दिन हर कोई अपने घर को दुल्हन की तरह सजाता है। इस दिन शाम के दिन अवश्य ही घर में दीपक जलाना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी इससे घर में प्रवेश करती हैं लेकिन इसके साथ घर से नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है और घर में खुशियां आती हैं।

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