वर्ष में केवल दशहरे के दिन खुलता है यह देवी मंदिर

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इस स्थान को माना जाता है कंकाली माता का मायका
रायपुर(नवप्रदेश)। शक्ति पर्व के आज अंतिम दिन जहां माता के भक्तों का देवी मंदिरों में तांता लगा रहा तो वहीं कल विजयादशमी पर्व के अवसर पर साल में केवल एक बार खुलने वाले देवी मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है। इस मंदिर को शहर के प्राचीन कंकाली माता का मायका भी माना जाता है। राजधानी रायपुर के प्राचीन कंकाली माता मंदिर से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर के दरवाजे केवल कल दशहरा पर्व के अवसर पर ही दर्शनार्थ खुलते हैं, इसके पश्चात इस मंदिर के दरवाजे पूरे वर्ष भर के लिए फिर से बंद कर दिए जाते हैं। इस प्राचीन मंदिर के बारे में काफी कम लोगों को ही जानकारी हो पाई है। लेकिन जिन लोगों को इसकी जानकारी है, वो हर साल यहां माथा टेकने जरूरत पहुंचते हैं। इस मंदिर में आज भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और सुबह से लेकर देर रात तक यहां श्रद्धालुओं का आना जारी रहता था। साल में केवल एक दिन दरवाजा खुलने के कारण यहां न केवल शहर के लोग बल्कि आसपास के शहरों से भी श्रद्धालुओं का दल दर्शन के लिए पहुंचता है।
मंदिर का इतिहास : शहर के बुजुर्गों की माने तो इस ऐतिहासिक मंदिर के साथ नागा साधुओं की रोचक जानकारी जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि काफी पहले यहां नागा साधुओं का एक दल आया हुआ था। नागा साधुओं का यह दल इसी स्थान पर ठहरा हुआ था, तब यहां बसाहट ही नहीं थी। आज जहां कंकालीपारा और आसपास की बस्तियां हैं, तब के समय में यहां प्राचीन दूधाधारी मंदिर और रावणभाठा मैदान तक ईमली, बबूल, झीन और बेल आदि पेड़ के घने जंगल होते थे। नागा साधुओं ने यहीं पर अपना डेरा डाला और अपनी ईष्ट देवी कंकाली माता की स्थापना की थी। नागा साधुओं के अस्त्र-शस्त्र आज भी इस प्राचीन मंदिर में सुरक्षित रखे गए हैं। साधनारत कई नागा साधुओं ने यहीं पर अपना देह त्याग किया था और कई लोगों ने यहीं समाधी ली थी। नागा साधुओं के समाधी स्थल आज भी यहां विद्यमान हैं और सभी समाधी स्थलों के ऊपर एक-एक शिवलिंग बना हुआ है। बाद में यहां स्थापित कंकाली माता की स्थापना वर्तमान मंदिर में किया गया। लेकिन इस मंदिर में सुरक्षित नागा साधुओं के अस्त्र और शस्त्र आज भी देखे जा सकते हैं। पूरे मंदिर परिसर की सफेद रंग से लिपाई-पुताई की जाती है और मंदिर परिसर में सर्वत्र शक्ति का प्रतीक त्रिशूल का चिन्ह बंदन से बना हुआ देखा जा सकता है।

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