मुखड़ा क्या देखे दर्पण में

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दलबदल का पैकेज

गिरीश पंकज

उस पार्टी के कुछ विधायक अपनी पार्टी की एकता को लेकर बहुत चिंतित थे। लेकिन एकता जो थी, वह किसी सुंदरी की तरह हाथ नहीं आ रही थी। कभी-कभी लगता था पास आ रही है, फिर अचानक दूर चली जाती थी । ‘सयोनारा  (टाटा) करते हुए।
उस दिन झखमार पार्टी के नेता तय करके ही आए थे कि आज तो एकता की घर वापसी हो के रहेगी । तब तक बड़े नेता पधारे नहीं थे । तीन विधायक ही बैठे थे। वे आपस में चर्चा करने के लिए चर्चा करने लगे।
एक नेता ने कहा – ‘ यार, अगर सत्ता में वापसी करनी है तो हमें एक होना पड़ेगा। देखो, लूटमार पार्टी के लोग कैसे एक हो गए। और हमसे कुर्सी छीन ली।
दूसरे ने कहा – ‘ एक तो होना है लेकिन हमें पहले नेक भी होना होगा । हमारे बीच कुछ ऐसी ताकते हैं जो नेक नहीं है । उनके कारण हम एक नहीं हो पा रहे हैं ।
इतना सुनते ही तीसरा नेता अचानक भड़क गया- ‘ व्हाट डू यू मीन बाइ कुछ लोग नेक नहीं है? अरे, मेरा नाम ही नेकचन्द है। मैं जन्मजात नेक हूं और तुम कह रहे हो कि यहां कोई नेक नहीं है।यह सरासर अन्याय है । मैं सब समझ रहा हूं कि तुम मेरे पिछले नमक घोटाले को सामने लाने की कोशिश कर रहे हो । हैं न?
दूसरे ने कहा – ‘ नहीं, मेरा मतबल यह नहीं था ।
तीसरे ने कहा – ‘हम तुम्हारा मतबल अच्छी तरह जानते हैं । पिछली बार भी तुमने यही किया था, जब मेरी लड़की रिक्शेवाले के साथ भाग गई थी । तब तुमने मजाक उड़ाते कहा था कि लोग अपना घर नहीं देखते और दूसरे घर की चिंता करते हैं । मैंने तो कभी तुम्हारी प्रेयसी के बारे में किसी से कुछ नहीं कहा।अब कहूँगा।
पहले ने हँसते हुए कहा – अरे मेरे दद्दा, मैं विपक्ष के बारे में कह रहा था। वो खुद एक नहीं हैं और उनके लोग हमारी एकता पर व्यंग्य करते हैं। कुछ समझा करो भाई।
तीसरा नेता बोला- ‘अब बात मत बनाओ। तुम अक्सर मुझ पर टांट कसते रहते हो। ऐसे में क्या ख़ाक होगी एकता। पिछले दिनों तुमने मेरे मोटे पेट पर व्यंग्य किया था कि लोग आजकल देश को खा-खा कर मोटे हुए जा रहे हैं। कहा था न?
पहला बोला- ‘कहा तो था लेकिन मेरा इशारा तुम्हारी तरफ नहीं था भाई। लूटमार पार्टी के नेता लंपट लाल की तरफ था। तुमने अपनी ओर ले लिया। माना कि तुम्हारा पेट अब बड़ा हो गया है लेकिन यह देश को लूटने के कारण नहीं हुआ है । सीधी-सादी जनता को लूटने के कारण, नहीं नहीं, मेरा मतलब यह है कि अधिक खाने के कारण तुम्हारा पेट निकल आया।
तीसरा बोला- ‘मैं समझ गया। तुम्हारे मुँह से अभी सच निकल ही गया। अब मैं इस बैठक का बहिष्कार करता हूँ। चलूँ, वैसे भी मुझे लूटमार पार्टी से ऑफर आ रहा है । पैकेज भी तगड़ा है । मैं अब वहां जा रहा हूं ।
दूसरे ने जीभ बाहर निकल ली और पूछा -मगर पैकेज क्या है ?तीसरे ने कहा -अब लाख-दो लाख का पॅकेज तो होगा नहीं। हम बिकते हैं तो अपने स्तर के हिसाब से। एक करोड़ मिल रहा है, बॉस ।
इतना सुनना था कि दोनों नेता एक दूसरे को देखने लगे और बोले -भाई मेरे, अकेले ही सौदा कर लिया। यह कैसी आपसी एकता? हम लोग अनेक कर्म-कु कर्म सामूहिक भी करते रहे हैं. इतना तो सोचा होता। जाओ, हमारे लिए भी बात करके आओ न । एक करोड़ मिला तो हम अपने पिताश्री को भी ठुकरा देंगे। इस पार्टी में रहते-रहते हमारा दम घुट रहा है। हम एकता की कितनी कोशिश कर रहे हैं लेकिन यहां एकता हो नहीं पाती। हर कोई एक दूसरे की टांग खींचने में लगा है । कोई किसी पर जमीन घोटाले का आरोप लगा देता है, तो कोई सेक्स स्केंडल उठा देता है। इससे अच्छा तो लूटमार पार्टी ही है । वहां जाओ तो लूटने की और अधिक सुविधा है । यहां तो ऊपरवाले ही खाने का ठेका लेकर बैठे हैं । हमने चुनाव जीतने के लिए करोड़ों खर्च किया लेकिन कमाने का कोई अवसर नहीं है। लूटमार पार्टी में अच्छी खासी सुविधा है तो क्यों न वहां चला जाए ।
इस बात को सुनकर तीनों विधायक एक हो गए और बोले- ‘हमारी एकता जिंदाबाद । हम लूटमार पार्टी में जाकर उसकी एकता को मजबूत करेंगे । इसके पहले कि बड़े नेता आकर ज्ञान पेलने लगें, हम फूट लेते हैं
और देखते- ही – देखते तीनों विधायक लूटमार पार्टी में शामिल हो गए और इधर ‘राष्ट्रीय झकमार पार्टी केवल गुबार देखते रह गई क्योंकि एकता का कारवां कब का गुजर चुका था। सुना है कि अब कुछ और विधायक मूड बना रहे हैं। उनको लगता है कि उनकी पार्टी डूबता हुआ जहाज है। इसमें सवार होना रिस्की हो सकता है।

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