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नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महापर्व

नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महापर्व

Astrology, Chhattisgarh
रायपुर, (नव प्रदेश) रा जधानी सहित पूर देश में सूर्य उपासना का महापर्व छठ का आज नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी की तिथि तक भगवान सूर्यदेव की अटल आस्था का पर्व छठ पूजा मनाया जाता है। नहाय खाय के साथ ही लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत हो जाती है। चार दिन तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है। इसके महत्व का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसमें किसी गलती के लिए कोई जगह नहीं होती इसलिए शुद्धता और सफाई के साथ तन और मन से भी इस पर्व में जबरदस्त शुद्धता का ख्याल रखा जाता है । छठ महापर्व आज से शुरू हो रहा है। पहले दिन मंगलवार की गणेश चतुर्थी है। पहले दिन सूर्य का रवियोग भी है। ऐसा महासंयोग 34 साल बाद बन रहा है। रवियोग में छठ की विधि विधान शुरू करने से सूर्य हर कठिन मनोकामना भी पूरी करते हैं। चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी
दीवाली : शुभ मुहूर्त में करें मां लक्ष्मी की पूजा, होगी धनवर्षा

दीवाली : शुभ मुहूर्त में करें मां लक्ष्मी की पूजा, होगी धनवर्षा

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जांजगीर-चांपा. (नवप्रदेश) महीने भर की तैयारी के बाद आखिरकार इंतजार की घडिय़ां खत्म हुई और दीपावली का पर्व आ गया। दीपावली पर माता लक्ष्मी का पूजन यदि विधि विधान से किया जाए और आरती के समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो पूजन सफल होता है। दीपावली रोशनी का त्योहार है। यह त्योहार न केवल एक नई शुरुआत करने का है बल्कि धन-दौलत और अच्छे स्वास्थ्य के पाने के लिए भी है। इस दौरान इस त्योहार पर शुभ और अशुभ मुहूर्त का विशेष ख्याल रखना होता है। माना जाता है कि जहां प्रकाश होता है वहां लक्ष्मी विराजती हैं। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूरे घर को रोशनी से सजाकर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस साल दीपावली 19 अक्टूबर को है। हर त्योहार के पूजन-विधि व शुभ मुहुर्त का अपना एक समय होता है। वैसे ही दीपावली में मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए शुभ मुहूर्त में किया गया पूजा शुभ फल देता है। अगर ष्ठद
इस नवरात्रि बन रहे महासंयोग, हस्त नक्षत्र में घट स्थापना

इस नवरात्रि बन रहे महासंयोग, हस्त नक्षत्र में घट स्थापना

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जांजगीर-चांपा (नव प्रदेश) शारदीय नवरात्र शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व 21 सितम्बर से शुरू होकर 29 सितम्बर को समाप्त होगा। इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी से होगा व गमन पालकी पर ही होगाए जो अति शुभ है। देवीपुराण में नवरात्रि में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताये इस बार माता का आगमन व गमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है। इस बार गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में घट स्थापना के साथ शक्ति उपासना का पर्व काल शुरु होगा। गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में यदि देवी आराधना का पर्व शुरू होए तो यह देवीकृपा व इष्ट साधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। देवी भागवत में नवरात्रि के प्रारंभ व समापन के वार अनुसार माताजी के आगमन प्रस्थान के वाहन इस प्रकार बताए गए हैं। नवरात्रि का महत्व. नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों का बोध करता हैए नवरात्रि में शक्
सप्ताह के इस 2 दिन महिलाएं जरूर पहने कांच की चूड़ी, चंद्रमा से जुड़ा है रहस्य

सप्ताह के इस 2 दिन महिलाएं जरूर पहने कांच की चूड़ी, चंद्रमा से जुड़ा है रहस्य

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जांजगीर-चांपा (नव प्रदेश)। चूड़ी के बिना महिलाओं का श्रृंगार अधूरा रहता है। पहले कांच की चूड़ी पहनी जाती ?थी। वहीं बदलते समय के साथ लाख, प्लास्टिक, मैटल और सोने की चूडिय़ां पहनी जाने लगी। इसके बावजूद आज भी जब कभी कोई पवित्र काम किया जाता है तो महिलाएं कांच की चूड़ी ही पहनती है, लेकिन क्या आप जानते हैं इन कांच चूड़ी का सीधा संबंध आपके जीवन से होता है और आपके साथ ही आपकी परिवार की जिंदगी को प्रभावित करती है। जानिए कैसे नवरात्रि में कहीं आप भी तो नहीं कर बैठते ये 2 बड़ी गलतियां, होता है कांच की चूड़ी का सीधा संबंध चंद्रमा और शुक्र से होता है। चूड़ी का रंग के कारण भी ग्रह का खास प्रभाव पड़ता है। चंद्रमा यानी आपका सुख होता हैं और जब कांच की चूड़ी न पहनने से आपके जीवन से चंद्रमा बाहर हो जाता है। चंद्रमा का प्रभाव भी आपके जीवन पर समाप्?त होने लगता है। हमेशा न सही, लेकिन सप्ताह में कम से कम दो दिन
शनि अमावस: इस मंत्र से माफी मांग करें अपने दुखों का अंत

शनि अमावस: इस मंत्र से माफी मांग करें अपने दुखों का अंत

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आज शनि अमावस्या है, हर श्रद्धालु की कोशिश होगी की शनि देव को प्रसन्न किया जा सके। शनि की टेढ़ी चाल से किसे डर नहीं लगता, उनके क्रोध से देवता भी थर-थर कांपते हैं, कहते हैं शनि की कृपा राजा को रंक और रंक को राजा बना सकती है। शनि कर्म फलदाता हैं। वह हर किसी को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। अपने अपराधों की क्षमा मांगने के लिए आज से अच्छा दिन और कोई नहीं हो सकता। बेशर्ते प्रायश्चित व क्षमा शुद्ध मन से किया जाए और भविष्य में गलतियों को दोहराया न जाए। अपनी शरण में आए हुए भक्त को वह कभी खाली नहीं लौटाते। शनि देव की प्रसन्नता के बाद व्यक्ति को परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है और शनि की दशा के समय कष्ट की अनुभूति नहीं होती। काले वस्त्र पहनकर शनि मंदिर में जाकर शनि मन्त्र ? शनैश्वराय नम: का जाप करें। इसके अतिरिक्त शनि चालीसा एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें, फिर शनिदेव की आरती करें। अंत में जान